Breaking News

गोवा से दिल्ली आ रही IndiGo की फ्लाइट का इंजन फेल     |   SCO समिट में 30 से ज्यादा अहम दस्तावेजों पर मुहर, AI से ऊर्जा सुरक्षा तक कई समझौते     |   राम मंदिर के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया तेज, 3 सदस्यीय कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट     |   संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे विवाद पर SC में सुनवाई टली, अब 8 सितंबर को होगी सुनवाई     |   BRICS 2026 कारकेड रिहर्सल को लेकर दिल्ली में ट्रैफिक एडवाइजरी जारी     |  

शहीद दिवस पर लोकसभा में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि

सोमवार को लोकसभा में महान क्रांतिकारी शहीद सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति को नमन करते हुए उन्हें भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान के लिए याद किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान इन महान क्रांतिकारियों को याद करते हुए उनके अद्वितीय साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को सराहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि, “अमर क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर आज सदन ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। इन महान सपूतों का अद्वितीय पराक्रम, अटूट साहस और देशभक्ति भारत की स्वतंत्रता के सपने को साकार करने में अमिट योगदान है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “इनका बलिदान केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय ही नहीं है, बल्कि हर भारतीय के दिल में राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रज्वलित करने वाली प्रेरणा है। देश उनकी इस अमूल्य कुर्बानी के लिए हमेशा ऋणी रहेगा। उनके आदर्शों और विचारों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीद दिवस के अवसर पर भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “आज हम भारत माता के वीर सपूत भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को नमन करते हैं। उनका बलिदान हमेशा हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित रहेगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कम उम्र में ही इन क्रांतिकारियों ने असाधारण साहस और देश की आजादी के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ निर्भीक होकर संघर्ष किया और देश को सर्वोपरि रखते हुए बलिदान का मार्ग चुना। भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे, जिन्हें 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी दी गई थी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।