मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उचित दर पर उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले चरण में 50 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने नौ जिलों के 15 सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों का औचक निरीक्षण किया। इनमें चार सरकारी और 11 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

24 सितंबर 2026 से शुरू हुए इस अभियान के दौरान दवाओं की खरीद दर और मरीजों से वसूली जा रही कीमत के साथ दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण, बिलिंग और कोल्ड-चेन व्यवस्था की भी जांच की गई। जांच टीमों ने फार्मेसिस्ट की मौजूदगी, जीवनरक्षक दवाओं के बिलिंग रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर समेत अन्य दस्तावेजों की भी जांच की।

90 दवाओं के सैंपल लिए गए

जांच के दौरान कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में दवाओं की खरीद कीमत और प्रिंटेड एमआरपी के बीच काफी अंतर पाया गया। विभाग के अनुसार, कई मामलों में अस्पतालों ने दवाएं एमआरपी से काफी कम कीमत पर खरीदीं, लेकिन मरीजों को दवाएं लेबल पर दर्ज एमआरपी पर दी जा रही थीं। ऐसी दवाओं को चिन्हित करते हुए उनकी गुणवत्ता जांच के लिए 90 औषधि नमूने लिए गए हैं। संबंधित निर्माता कंपनियों से प्रिंटेड एमआरपी और अस्पताल के स्टॉकिस्ट को उपलब्ध कराई गई प्राइस टू रिटेलर (पीटीआर) दर के अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
दो मेडिकल कॉलेजों में डीपीसीओ उल्लंघन

जांच में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में चार और जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हापुड़ में तीन दवाओं में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के उल्लंघन की जानकारी सामने आई। इस संबंध में संबंधित निर्माता फर्मों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बाराबंकी और जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हापुड़ में दवाओं की कोल्ड-चेन व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं मिली। विभाग ने संबंधित अस्पतालों को ऐसी दवाओं का पूरा स्टॉक निर्माता कंपनी को वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।

संतोष मेडिकल कॉलेज में 4.86 करोड़ की दवाओं पर रोक

संतोष मेडिकल कॉलेज, गाजियाबाद में दवाओं की सप्लाई चेन से जुड़ी विसंगतियां मिलने के बाद विभाग ने 4.86 करोड़ रुपये मूल्य की औषधियों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कुछ फार्मेसियों में मौके पर दवाओं के खरीद बिल उपलब्ध नहीं कराए जा सके। ऐसे प्रतिष्ठानों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
76 दवाओं में सीलिंग प्राइस से अधिक एमआरपी

एफएसडीए के अनुसार, पिछले एक साल के निरीक्षणों में बाजार में उपलब्ध 76 औषधियों में डीपीसीओ, 2013 के तहत निर्धारित सीलिंग प्राइस से अधिक एमआरपी पर बिक्री के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में 15 औषधि विनिर्माण इकाइयों के 49 सीएंडएफ, प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्टॉकिस्ट्स को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कहा गया है कि यदि उनके पास राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की कोई वैधानिक छूट या एथिकल रिलैक्सेशन है तो उसके दस्तावेज उपलब्ध कराएं। विभाग ने निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर स्टॉकिस्ट को आपूर्ति किए गए स्टॉक को बाजार से वापस कराने के निर्देश भी दिए हैं।
डीपीसीओ और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई

एफएसडीए ने कहा है कि औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 का पालन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत अनिवार्य है। संबंधित मामलों में डीपीसीओ और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए स्थानीय औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
इन 15 मेडिकल कॉलेजों में हुई जांच

पहले चरण में आगरा, अयोध्या, बाराबंकी, बरेली, गाजियाबाद, हापुड़, कानपुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और वाराणसी के 15 मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों की जांच की गई। इनमें एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, राजकीय मेडिकल कॉलेज अयोध्या, हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी, रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बरेली, संतोष मेडिकल कॉलेज गाजियाबाद, जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल हापुड़, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज और आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू वाराणसी समेत अन्य संस्थान शामिल हैं।