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सरकारी स्कूलों में No Entry का आदेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यूपी-राजस्थान में पत्रकार-YouTubers की एंट्री पर रोक को चुनौती

राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और आम लोगों के जाने पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों की हालत और वहां होने वाले काम की जानकारी लेने के लिए लोगों को स्कूलों में जाने की अनुमति मिलनी चाहिए।

याचिका वकील नरेंद्र मिश्रा ने प्रिया मिश्रा की ओर से दाखिल की है। मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले का जिक्र किया गया। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।

याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उन नियमों को चुनौती दी गई है, जिनके तहत सरकारी स्कूलों में जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है। इसके अलावा स्कूलों में फोटो खींचने, वीडियो बनाने, इंटरव्यू लेने, ऑडियो रिकॉर्ड करने और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगाई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की रोक जरूरत से ज्यादा है। इससे लोगों को स्कूलों की असली स्थिति सामने लाने में परेशानी होगी।

याचिका में कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी निजी जानकारी की रक्षा करना जरूरी है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा के नाम पर स्कूल की इमारत, शौचालय, पानी, बिजली और दूसरी सुविधाओं की जानकारी लेने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। याचिका में सुझाव दिया गया है कि बच्चों के चेहरे और उनकी निजी जानकारी को छिपाया जा सकता है। साथ ही पढ़ाई के समय कक्षाओं में जाने पर रोक लगाई जा सकती है। इससे बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहेगी और स्कूल की व्यवस्था की जानकारी भी सामने आ सकेगी।

याचिका में कहा गया है कि कई सरकारी स्कूलों में भवन, शौचालय, पीने के पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कुछ जगहों पर मिड-डे मील, छात्रों की उपस्थिति और नामांकन से जुड़ी समस्याएं भी हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि पत्रकार और दूसरे लोग अगर स्कूलों की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट करते हैं, तो इससे इन कमियों की जानकारी सरकार और आम लोगों तक पहुंच सकती है।

याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उन आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है, जिनमें सरकारी स्कूलों में प्रवेश और फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही मांग की गई है कि स्कूलों की स्थिति की जानकारी लेने और सार्वजनिक हित में रिपोर्टिंग करने पर बिना वजह रोक नहीं लगनी चाहिए। याचिका में उन सरकारी स्कूलों की राज्यवार जानकारी देने की भी मांग की गई है, जहां भवन, शौचालय और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।