Breaking News

UP में बारिश-आंधी का कहर, 48 घंटे में 15 मौतें     |   भारत-वेस्टइंडीज पहला वनडे आज, तिरुवनंतपुरम में होगा मुकाबला     |   आज प्रसारित होगा PM मोदी के 'मन की बात' का 138वां एपिसोड     |   जोधपुर के आसमान में गरजे अमेरिकी फाइटर जेट, F-35 ने भी दिखाया दम     |   अमेरिका के न्यू जर्सी में बाढ़ का पानी, नॉरईस्टर से बिगड़े हालात     |  

नकली लिपाग्लिन दवा के कारोबार का खुलासा, दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज

नकली और काउंटरफीट लिपाग्लिन टैबलेट के क्रय-विक्रय और फर्जी बिलिंग के मामले में औषधि विभाग ने कार्रवाई की है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सर्वेश सिंह उर्फ मुन्ना भाई और राजस्थान की फर्म मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार के खिलाफ थाना अमीनाबाद में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO), नॉर्थ जोन, गाजियाबाद और राजस्थान के औषधि नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त जांच में सामने आया। जांच लिपाग्लिन टैबलेट के बैच नंबर IB00327A से संबंधित है।

9,610 स्ट्रिप की बिक्री का मामला

जांच के अनुसार, काउंटरफीट लिपाग्लिन की 9,610 स्ट्रिप मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस द्वारा गुजरात की दो फर्मों को बेची गई थीं। रिकॉर्ड में इन दवाओं की खरीद लखनऊ स्थित मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स से कुल 11,360 स्ट्रिप दिखाई गई थी। जांच टीम जब क्योरहेल्थ मेडिकोस के लाइसेंस प्राप्त परिसर में पहुंची तो वहां दवाओं का कोई स्टॉक नहीं मिला। परिसर किसी अन्य व्यवसाय को किराए पर दिया गया था।

बालाजी फार्मास्युटिकल्स का लाइसेंस पहले ही रद्द

जांच में सामने आया कि लखनऊ में मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स के नाम से जारी औषधि लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था। फर्म का जीएसटी पंजीकरण भी रद्द हो चुका था। पूछताछ में बालाजी फार्मास्युटिकल्स के पूर्व संचालक ने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया। वहीं, क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार ने वीडियो कॉल के दौरान बताया कि उसे दवाओं की आपूर्ति ‘मुन्ना भाई’ के माध्यम से हुई थी।

मोबाइल नंबरों से सर्वेश सिंह से जुड़ा मामला

जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का संबंध सर्वेश सिंह और अन्य व्यक्तियों से सामने आया। विभाग के अनुसार, इसी लिपाग्लिन बैच के संबंध में महाराष्ट्र के ठाणे शहर में भी सर्वेश उर्फ मुन्ना सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।

औषधि विभाग के मुताबिक, निरस्त लाइसेंस के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल कर फर्जी अभिलेख और बिल तैयार किए गए तथा काउंटरफीट दवाओं का क्रय-विक्रय किया गया। मामले में बीएनएस की धारा 3(5), 276, 277, 278, 318(4), 319, 336(2) और 340(2) समेत अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।