Breaking News

चढ़ावा चोरी केस: आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने कराई थी भव्य राम कथा, ₹50 लाख खर्च का दावा     |   PAK आतंकवाद नहीं रोकेगा तो सिंधु जल संधि पर रुख नहीं बदलेगा: भारतीय विदेश मंत्रालय     |   भारतीय नाविक के शव से छेड़छाड़ पर वेनेजुएला से जांच की मांग: MEA प्रवक्ता जायसवाल     |   केतन हत्याकांड में नया खुलासा! सिया-चेतन करते थे 'कोड वर्ड' में बात, पुलिस ने जब्त किया दूसरा मोबाइल फोन     |   केतन मर्डर: सिया और चेतन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया     |  

लैंड फॉर जॉब्स केस में लालू यादव को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामले में आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका निराधार है और इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। यह आदेश जस्टिस रविंदर दुडेज़ा की बेंच ने दिया। लालू यादव ने अपनी याचिका में 2022 में दर्ज सीबीआई की एफआईआर, 2022, 2023 और 2024 में दाखिल चार्जशीट्स और उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत मामले में संज्ञान लिया गया था।

याचिका में उन्होंने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई, जो कानूनी रूप से गलत है। उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कथित घटनाएं उस समय की हैं जब वे रेल मंत्री थे, इसलिए यह उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे में आती हैं और जांच शुरू करने से पहले अनुमति जरूरी थी।

वहीं, सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में किसी पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी, क्योंकि नियुक्तियों का फैसला मंत्री नहीं बल्कि जनरल मैनेजर स्तर पर लिया गया था। यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर कथित अनियमित नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि जमीन के बदले नौकरी दी गई, जिसमें जमीन लालू यादव के परिवार या करीबी लोगों के नाम ट्रांसफर की गई।

सीबीआई ने 18 मई 2022 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें लालू यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियां और अन्य अज्ञात अधिकारी व निजी व्यक्ति शामिल हैं। याचिका में लालू यादव ने देरी का मुद्दा भी उठाया था, यह कहते हुए कि कथित घटनाओं के करीब 14 साल बाद एफआईआर दर्ज की गई और पहले की जांच बंद कर दी गई थी। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और मामले की जांच व कार्यवाही जारी रहेगी।