Raksha Bandhan 2026: आज देशभर में भाई-बहन के प्यार और अटूट रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इस खास दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा करने और हर परिस्थिति में उनका साथ देने का वचन देते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ राखी बांधने तक सीमित नहीं है। यह पर्व प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और एक-दूसरे की सुरक्षा के भाव का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इससे जुड़ी पुरानी पौराणिक कथाएं क्या हैं?
रक्षाबंधन का क्या मतलब होता है?
रक्षाबंधन दो शब्दों से मिलकर बना है—रक्षा और बंधन। इसका मतलब है सुरक्षा का बंधन। राखी का धागा भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। हालांकि पुराने समय में रक्षा सूत्र केवल भाई-बहन के बीच ही नहीं बांधा जाता था। युद्ध, धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष अवसरों पर भी लोगों की सुरक्षा और सफलता की कामना के लिए रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा रही है।
क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन?
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी खुशहाली की प्रार्थना करती है। भाई भी बहन की रक्षा करने और जीवनभर उसका साथ देने का संकल्प लेता है। आज के समय में रक्षाबंधन का संदेश और भी व्यापक हो गया है। कई जगह बहनें देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को राखी बांधती हैं। वहीं लोग पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देते हैं।
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कहानी का उल्लेख किया जाता है। मान्यता है कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से खून निकलने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण द्रौपदी के इस प्रेम और अपनापन को कभी नहीं भूले। महाभारत के दौरान जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई। इस कथा को प्रेम, विश्वास और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है।
राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर राजा बलि के पास पहुंचे थे। राजा बलि की भक्ति और दान से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया। कहा जाता है कि बाद में माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया। इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ वापस जाने की अनुमति दे दी। इस कथा को भी रक्षा सूत्र की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
इंद्र और इंद्राणी की कथा

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था। युद्ध में देवताओं की स्थिति कमजोर होने लगी। तब इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर एक पवित्र रक्षा सूत्र बांधा। मान्यता है कि इस रक्षा सूत्र और आशीर्वाद से इंद्र को शक्ति मिली और देवताओं की विजय हुई। इसलिए रक्षा सूत्र को शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है।
रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी

रक्षाबंधन से जुड़ी एक लोकप्रिय ऐतिहासिक कहानी रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं की भी है। लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, जब मेवाड़ पर संकट आया तो रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद की अपील की थी। कहा जाता है कि हुमायूं ने राखी के रिश्ते का सम्मान किया और उनकी मदद के लिए आगे बढ़े। हालांकि इस घटना को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं, लेकिन यह कहानी आज भी राखी के रिश्ते और आपसी विश्वास के उदाहरण के रूप में सुनाई जाती है।
कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन?
रक्षाबंधन के दिन बहनें पूजा की थाली सजाती हैं। इसमें राखी, रोली, चावल, दीपक और मिठाई रखी जाती है। इसके बाद बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती करती है और उसकी कलाई पर राखी बांधती है। भाई बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा व साथ निभाने का वचन देता है।
रक्षाबंधन का असली संदेश
रक्षाबंधन सिर्फ भाई की ओर से बहन की रक्षा का वादा नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के सम्मान, प्यार और साथ का पर्व है। आज के समय में इस त्योहार का अर्थ और भी बड़ा हो गया है। यह पर्व हमें सिखाता है कि मजबूत रिश्ते केवल खून के संबंधों से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से बनते हैं।