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हिमाचल में भीषण आग का कहर, बोइल्यूगंज और कसौली में बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। शिमला के बोइल्यूगंज क्षेत्र में सरकारी मानसिक अस्पताल के पास भीषण आग लग गई, जिसने करीब 1000 वर्ग फीट क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

बोइल्यूगंज फायर ऑफिसर रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि सुबह करीब 10:43 बजे आग लगने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि आग काफी बड़े क्षेत्र में फैल चुकी थी, जिसके कारण उसे नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है। आग को तेजी से फैलने से रोकने के लिए फायर लाइन का रास्ता साफ किया जा रहा है और लगातार आग बुझाने का प्रयास जारी है।

स्थानीय निवासी नरेंद्र कुमार के अनुसार आग सरकारी मानसिक अस्पताल और पास स्थित डॉग हाउस के नजदीक लगी। उन्होंने बताया कि आग इतनी तेज थी कि आसपास के पेड़ भी इसकी चपेट में आ गए, जबकि गांव के कुछ घर भी खतरे में आ गए थे। स्थानीय लोगों ने भी फायर विभाग और वन विभाग के साथ मिलकर आग बुझाने में मदद की।

वहीं, इससे पहले सोलन जिले के कसौली बीट क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग को 27 घंटे से अधिक समय तक चले अभियान के बाद काबू में किया गया। यह आग 26 मई को दोपहर करीब 1 बजे लगी थी और लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैल गई थी। वन विभाग ने इसे ग्राउंड फायर बताया है, हालांकि आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

आग बुझाने के लिए राज्य वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और भारतीय वायुसेना ने संयुक्त अभियान चलाया। भारतीय वायुसेना के चार Mi-17 V5 हेलीकॉप्टरों ने 150 से अधिक sorties उड़ान भरते हुए 62,500 लीटर पानी गिराकर आग पर काबू पाने में मदद की। हेलीकॉप्टरों ने सुखना लेक से पानी भरकर ‘बांबी बकेट’ तकनीक के जरिए आग बुझाने का काम किया।

अधिकारियों के मुताबिक आग ने कसौली की पहाड़ियों में सैन्य प्रतिष्ठानों और रिहायशी इलाकों के लिए खतरा पैदा कर दिया था। कठिन पहाड़ी इलाकों, तेज ढलानों और अनिश्चित हवाओं के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। वन विभाग के अनुसार इस आग से राज्य को करीब 67 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मानसून के बाद जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जीवन के चलते इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।