CJP के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपनी लंबी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश को उनकी जरूरत है और उनकी जिंदगी बेहद कीमती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अपनी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं और उनसे भूख हड़ताल खत्म करने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वांगचुक भूख हड़ताल खत्म भी कर देते हैं, तब भी प्रदर्शन जारी रहेगा और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 25वां दिन है और 25 दिनों से बिना खाना खाए रहने के कारण उनकी जान को बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि सोनम वांगचुक के साथ कुछ गलत हो, इसलिए उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील कर रहे हैं। अभिजीत दिपके ने कहा कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने समर्थकों से भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन को महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के बताए रास्ते पर आगे बढ़ाया जाएगा और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे आंदोलन या देश की छवि खराब हो।
दिल्ली हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट बुधवार को जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
दिल्ली के अधिवक्ता शकील अब्बास ने अधिवक्ता शकील शेख एंड एसोसिएट्स के माध्यम से यह याचिका दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, नई दिल्ली जिले के डीसीपी, संसद मार्ग थाने के एसएचओ, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण आंदोलन को कथित तौर पर दबाने के दौरान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(c) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। याचिका के अनुसार, सोनम वांगचुक और कई छात्रों व नागरिकों ने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शन में शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा पेपर लीक से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। याचिका में दावा किया गया है कि 17 जुलाई तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी हिंसा की सूचना नहीं थी।
याचिका में 18 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि भूख हड़ताल के 21वें दिन पुलिस प्रदर्शन स्थल पर पहुंची। आधिकारिक तौर पर वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से सफदरजंग अस्पताल ले जाने की बात कही गई, लेकिन याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन स्थल को खाली कराया गया और कई प्रदर्शनकारियों को उनकी इच्छा के खिलाफ हटाया या हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सोनम वांगचुक या किसी अन्य शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ केवल शांतिपूर्ण और कानूनी प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जबरन कार्रवाई, अवैध हिरासत, धमकी, उत्पीड़न या जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग न किया जाए। इसके लिए अधिकारियों को कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश देने की मांग की गई है।