पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन भी सदन में सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे सदन का माहौल काफी गरम रहा। आप सरकार के मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सदस्यों का सदन में व्यवहार उचित नहीं रहा और वे बार-बार कार्यवाही में व्यवधान डाल रहे हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि दस दिन के बजट सत्र में कांग्रेस को बोलने के लिए केवल 16 मिनट का ही समय दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी के पास अधिक विधायक हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि विपक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के स्पीकर किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि पूरे सदन के होते हैं, इसलिए उन्हें सभी दलों को समान अवसर देना चाहिए।
बाजवा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भले ही मौजूदा सरकार का आखिरी बजट हो, लेकिन यह आम आदमी पार्टी का भी आखिरी बजट साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता आप सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुई तीखी बहस के कारण सदन का माहौल लगातार गरम बना रहा। हालांकि सरकार का कहना है कि वह बजट से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष अपने सवालों को उठाने पर जोर दे रहा है।