लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए उनका अथक संघर्ष सभी के लिए प्रेरणा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम का मानना था कि संविधान ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों की असली ताकत है।
उन्होंने लिखा, “बहुजन नायक आदरणीय मान्यवर कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। गरीबों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए उनका अथक संघर्ष और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है।” राहुल गांधी ने आगे कहा, “उनका विश्वास था कि संविधान ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों की असली ताकत है। आज वही संविधान खतरे में है—जो लोग बाबा साहेब के संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए, वही उसे कमजोर करने में लगे हैं।”
उन्होंने कहा कि जब तक सत्ता में भागीदारी नहीं होगी, तब तक न्याय संभव नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से बहुजन समाज की भागीदारी और सम्मान तथा संविधान की रक्षा के लिए खड़ी रही है—पहले भी, अब भी और आगे भी। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कांशीराम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “सामाजिक न्याय की विचारधारा के नायक और दलित, वंचित व शोषित वर्गों की बुलंद आवाज श्री कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनके विचारों और आंदोलनों ने समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को नई ऊंचाई दी। उनके विचार हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।” इस बीच बीएसपी प्रमुख मायावती ने भी लखनऊ में पार्टी संस्थापक कांशीराम को पुष्पांजलि अर्पित की।
कांशीराम, बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक, का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान और बहुजन समाज को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया। कम उम्र से ही कांशीराम में दलित और शोषित समुदायों की समस्याओं के प्रति गहरी संवेदनशीलता थी। उन्होंने जाति व्यवस्था से पैदा हुई असमानताओं को पहचाना और संगठित राजनीतिक आंदोलन के जरिए इसके खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया।
1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यकों को एकजुट कर एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाना था। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक समानता के लिए अपने संघर्ष को लगातार जारी रखा और बहुजन समाज के लोगों को संगठित कर समानता और न्याय के आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।