Breaking News

तेलंगाना सरकार ने अकुशल श्रेणी के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹12750 से बढ़ाकर ₹16000 की     |   दिल्ली हाईकोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स केस में राघव चड्ढा को राहत देने से इनकार किया     |   अभिषेक बनर्जी को HC से राहत, अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी मामले में कार्रवाई पर रोक     |   ट्विशा मौत मामले फंसे पति समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दी     |   TVK कैबिनेट में शामिल होने पर IUML सहमत, एएम शाहजहां का नाम प्रस्तावित किया     |  

DRI की बड़ी कार्रवाई, 120 करोड़ रुपये के ई-सिगरेट और वेप्स जब्त

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में फैले ई-सिगरेट और वेप्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और वेप्स जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 120 करोड़ रुपये बताई गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, बीते कुछ दिनों में कई बंदरगाहों, हवाई अड्डों और इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) पर व्यापक अभियान चलाकर प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों की अवैध खेप को पकड़ा गया।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के तहत काम करने वाली DRI ने खुफिया सूचना के आधार पर उन संदिग्ध आयात खेपों को ट्रैक किया, जिन्हें कस्टम जांच से बचाने के लिए गलत तरीके से घोषित किया गया था। वित्त मंत्रालय ने कहा, “विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर DRI ने कई संदिग्ध आयात खेपों की पहचान कर उन्हें ट्रैक और इंटरसेप्ट किया, जिन्हें कस्टम जांच से बचने के लिए गलत तरीके से घोषित किया गया था।”

मंत्रालय के मुताबिक, विस्तृत जांच के दौरान विभिन्न ब्रांड, फ्लेवर और मॉडल के लगभग 3 लाख ई-सिगरेट और वेप्स जब्त किए गए, जिनकी कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक है। जांच में यह भी सामने आया कि जब्त किए गए सभी प्रतिबंधित उत्पाद चीन से मंगाए गए थे। तस्कर इन्हें “फर्नीचर” और “मेटल चेयर पार्ट्स” जैसे सामान के रूप में छिपाकर भारत ला रहे थे।

भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक स्मोकिंग डिवाइस के आयात और बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे उत्पादों का व्यावसायिक आयात सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों का उल्लंघन माना जाता है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) भारत में “इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019” के तहत प्रतिबंधित हैं। यह कानून सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और लोगों को निकोटीन से होने वाले नुकसान से बचाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।