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J-K: ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी शस्त्रागार की भूमिका, सटीक कामयाबी का बने जरिया

आग उगलने के लिए तैयार तोपें…

लगातार आसमान को स्कैन करते वायु रक्षा रडार…

चौबीसों घंटे काम करते कमांड सेंटर…

बहादुर भारतीय सैनिक हर तरह से तैयार - राष्ट्र की रक्षा के लिए।

ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी सीमा पार आतंकवाद और उसके रहनुमाओं को तगड़ा झटका दे चुकी है। फिर भी भारतीय सेना जम्मू कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पूरी तरह चौकस है। किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए लगातार सतर्क है। 

ऑपरेशन सिंदूर सात मई को शुरू हुआ था। ये जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के हाथों बेगुनाहों की बर्बर हत्या का जवाब था। सावधानी से चले अभियान में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों के नौ ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया।

सैनिक अभियान रोकने पर सहमति बनने के बाद, भारतीय सेना ने दिखाया कि कैसे स्वदेशी हथियारों और तोपखाने ने सटीकता के साथ विनाशकारी हमले किए थे। सेना ने रणभूमि की रणनीति और रक्षा के अटूट संकल्प के बारे में विस्तृत जानकारी दी। 

आतंकियों पर भारत के हमले का जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सैनिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। ये भारतीय हवाई रक्षा प्रणाली की अग्निपरीक्षा थी। भारत ने जवाब दिया आकाशतीर प्रणाली से। ये आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेश में विकसित वायु सुरक्षा प्रणाली है।

ये प्रणाली शुरुआती चेतावनी देने वाले रडारों से लैस है। इसने दुश्मन के ड्रोन के झुंड की पहचान की और बीच हवा में ही उन्हें नष्ट कर दिया। ड्रोन ने जहां निशाना साधा था, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा। भारत में बने एल-70 एयर डिफेंस गन ने भी अपनी ताकत दिखाई। छोटी दूरी के एयर शील्ड ने हमले की तमाम कोशिशों को नाकाम कर दिया।

भारत लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। उन्नत प्रौद्योगिकी और अदम्य साहस की जुगलबंदी के साथ भारतीय सशस्त्र सेनाएं हमेशा हाई अलर्ट पर हैं - किसी भी खतरे से राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तैयार।