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दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, 5.138 किलो अफीम बरामद

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीमा पार अफीम की तस्करी, ड्रग्स के बदले हथियार और आतंकी फंडिंग से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार नामित खालिस्तानी आतंकवादी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

द्वारका क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सिंडिकेट के चार कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अलग-अलग एक्सपोर्ट पार्सल और एक आरोपी के कब्जे से कुल 5.138 किलो अफीम बरामद की है। पुलिस के अनुसार, बरामद अफीम की कनाडा में अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये है।

पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच 7 फरवरी को मिली एक खास सूचना के बाद शुरू हुई। दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कूरियर कंपनी में कनाडा भेजे जाने से पहले एक पार्सल को रोका गया। पार्सल में सामान्य खाने-पीने और घरेलू सामान होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन जांच के दौरान उसके अंदर एक खास तरीके से बनाए गए नकली निचले हिस्से के नीचे 2.998 किलो अफीम छिपी मिली। इसके बाद क्राइम ब्रांच थाने में NDPS एक्ट की धारा 18/23 के तहत मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने कूरियर चेन को खंगाला, डिजिटल डिवाइस और पैसों के लेन-देन की जांच की और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की जानकारी जुटाई। पुलिस ने कनाडा भेजे जाने वाले एक अन्य पार्सल से 921 ग्राम, तीसरे एक्सपोर्ट पार्सल से 1.196 किलो और आरोपी सिमरनजीत सिंह के कब्जे से 23 ग्राम अफीम बरामद की।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यदविंदर सिंह उर्फ जसन संधू और जीवन सिंह के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फैले एक संगठित नेटवर्क का पता चला है। आरोप है कि विदेश में बैठे हैंडलर अफीम की खरीद, उसे छिपाने, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और विदेश भेजने का काम भारत में मौजूद लोगों के जरिए करवाते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी KYC दस्तावेज, नकली भेजने वाले की जानकारी, एन्क्रिप्टेड ऐप और दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों व UPI चैनलों का इस्तेमाल करते थे।

जांच में कथित तौर पर ड्रग्स-फॉर-वेपन्स नेटवर्क का भी पता चला है। पुलिस के अनुसार, अफीम विदेश भेजी जाती थी और उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अर्श डल्ला से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों और विदेश में मौजूद कथित हैंडलरों को भुगतान करने के लिए किया जाता था। इसके बदले हथियारों को कथित तौर पर सीमा पार ड्रोन के जरिए पंजाब में पहुंचाया जाता था। इन हथियारों का इस्तेमाल राज्य में सक्रिय गिरोह के सदस्यों और उनके सहयोगियों द्वारा किए जाने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, सिंडिकेट सुरक्षा जांच से बचने के लिए GPS आधारित डेड ड्रॉप, Signal और WhatsApp जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप, सामान छिपाने के लिए विशेष रूप से बनाए गए नकली हिस्सों और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करता था। डिजिटल और वित्तीय जांच से आरोपियों के बीच संपर्क, पार्सल भेजने वालों और पैसों के लेन-देन से जुड़े लिंक सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय हरदीप सिंह पंजाब के बरनाला का रहने वाला है और वह नेटवर्क में अफीम की खरीद और उसे भेजने की व्यवस्था करता था।

30 वर्षीय यदविंदर सिंह उर्फ जसन संधू हरियाणा के सिरसा का रहने वाला है। उस पर अफीम की खरीद, उसे छिपाने और पैक करने के साथ भारत में मौजूद लोगों और विदेश में बैठे कथित साजिशकर्ताओं के बीच संपर्क का काम करने का आरोप है। 24 वर्षीय सिमरनजीत सिंह पंजाब के बठिंडा का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, उसने फर्जी KYC दस्तावेज तैयार कराने और पार्सल बुक कर उन्हें भेजने में मदद की। वहीं, 23 वर्षीय जीवन सिंह राजस्थान के बालोतरा का रहने वाला है और उस पर राजस्थान से जुड़े नेटवर्क में कड़ी के रूप में काम करने का आरोप है।

पुलिस का कहना है कि जांच में फरार आरोपियों और साजिशकर्ताओं की कथित भूमिका भी सामने आई है। इनमें अर्श डल्ला, उसके कथित हैंडलर और पंजाब में सक्रिय उसके सहयोगी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, पंजाब के मोगा का रहने वाला अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला को जनवरी 2023 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया था। पुलिस ने उसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) से भी जुड़ा बताया है। क्राइम ब्रांच अब फरार आरोपियों को पकड़ने, पूरे वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और विदेश में मौजूद कथित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर और बरामदगी तथा पूरक चार्जशीट की कार्रवाई की जा सकती है।