प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी और ‘डीपफेक’ से निपटने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल खतरे अब राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में सरकारों, तकनीकी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों को मिलकर समन्वित कदम उठाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ (IMC) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि तकनीक तभी बड़े स्तर पर प्रभावी हो सकती है, जब लोगों का उस पर भरोसा हो।
‘धोखाधड़ी लोगों तक पहुंचने से पहले रोकने की जरूरत’
पीएम मोदी ने ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (GSMA) और दुनियाभर के टेलीकॉम ऑपरेटरों से अपील की कि ऐसा वैश्विक तंत्र तैयार किया जाए, जो डिजिटल धोखाधड़ी को लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक सके। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने की दिशा में अपने अनुभवों से काफी कुछ सीखा है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।
‘डीपफेक एक बड़ी चुनौती’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देश के व्यक्ति की मदद से तीसरे देश में अपराध कर सकता है। ऐसे में साइबर अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘डीपफेक’ भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है और इससे निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
हर जिले तक पहुंची 5G सेवा
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में डिजिटल क्रांति से आए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल अभियान ने डिजिटल खाई को पाटने में मदद की है। आज देश के हर जिले तक 5G सेवा पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे लोगों का जीवन आसान हुआ है।
DBT से करीब 5 लाख करोड़ रुपये बचाए
पीएम मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए करीब 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए। इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए।
उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों के खातों में जमा की गई है। यह उन किसानों तक भी पहुंची, जिन्हें पहले सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सब तकनीक के कारण संभव हुआ है।