मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार, 8 नवंबर को गोरखपुर के वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचकर वहां के परिवारों के साथ दीपावली मनाएंगे। मुख्यमंत्री हर साल वनटांगिया समुदाय के लोगों के बीच दीपावली मनाते हैं। सांसद रहते हुए उन्होंने इस परंपरा की शुरुआत की थी, जिसे मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी रखा है। इस बार भी सीएम योगी गांव के लोगों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें 77.97 करोड़ रुपये की 26 परियोजनाओं का शिलान्यास और 4.43 करोड़ रुपये की 26 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। प्रमुख परियोजनाओं में वनटांगिया गांव को जोड़ने वाली इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण शामिल है।
2009 से वनटांगिया परिवारों के साथ मना रहे दीपावली
योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2009 में वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाने की शुरुआत की थी। उस समय यह समुदाय लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और नागरिक अधिकारों से वंचित था। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस परंपरा को जारी रखा। हर साल वह गांव पहुंचकर बच्चों को मिठाई, कॉपी-किताबें और उपहार देते हैं। उनके आगमन को लेकर गांव में उत्साह का माहौल है और लोग घरों की सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट में जुटे हैं।
कभी नागरिक सुविधाओं से वंचित थे वनटांगिया परिवार
वनटांगिया समुदाय का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा है। उस समय रेलवे स्लीपर बनाने के लिए साखू के पेड़ों की कटाई की गई थी। जंगलों को दोबारा विकसित करने के लिए गरीब मजदूरों और भूमिहीन परिवारों को जंगल में बसाया गया। इसके लिए म्यांमार की टांगिया पद्धति का इस्तेमाल किया गया। इसी पद्धति से जंगलों की देखभाल करने वाले लोग वनटांगिया कहलाए।
वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल के आसपास पांच वनटांगिया बस्तियां बसाई गईं। देश की आजादी के बाद भी इस समुदाय को नागरिकों जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकीं। उनके पास पक्के मकान बनाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पाने के पर्याप्त अवसर नहीं थे। जंगल से बेदखली का डर भी हमेशा बना रहता था।
योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा
वर्ष 1998 में गोरखपुर का सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया परिवारों की समस्याओं को उठाया। उन्होंने इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयास शुरू किए। वर्ष 2003 से जंगल तिकोनिया नंबर तीन में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाया गया।
वर्ष 2009 में वनटांगिया बच्चों की पढ़ाई के लिए अस्थायी स्कूल बनाने के दौरान वन विभाग ने मुकदमा भी दर्ज कराया था। बाद में गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से विद्यालय संचालित हुआ। इसके जरिए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास जारी रहा।
राजस्व गांव का दर्जा मिलने से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके प्रयासों से वनटांगिया बस्तियों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला। इसके बाद इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, आवास, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी सुविधाओं का विस्तार हुआ।
आज वनटांगिया परिवारों को पक्के मकान, राशन कार्ड, आधार कार्ड, रसोई गैस और कृषि भूमि जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। बच्चों को स्कूलों में शिक्षा मिल रही है और पात्र लोगों को वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।
कुसम्ही जंगल में बनेगा ईको पार्क, पिपराइच को मिलेगा वैश्विक नगर बाजार
दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री कुसम्ही जंगल में 4.84 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ईको पार्क का शिलान्यास करेंगे। इसमें स्विस कॉटेज सहित पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा पिपराइच नगर पंचायत में 1.91 करोड़ रुपये की लागत से वैश्विक नगर बाजार बनाया जाएगा। इससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक 3.65 करोड़ रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
वनटांगिया गांव में मुख्यमंत्री की दीपावली अब एक परंपरा बन चुकी है। इस आयोजन के जरिए मुख्यमंत्री न केवल समुदाय के लोगों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते हैं, बल्कि विकास परियोजनाओं के माध्यम से गांवों को बेहतर सुविधाएं देने का संदेश भी देते हैं।