Breaking News

वेस्ट एशिया संकट: ‘नागरिकों-पावर प्लांट पर हमले गलत’, लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा     |   वेस्ट एशिया संकट: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रुकावट अस्वीकार्य’, लोकसभा में बोले PM मोदी     |   ‘बातचीत के जरिए होर्मुज से भारत के कई जहाज निकले’, लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा     |   ‘ईरान जंग के बीच होर्मुज से जहाजों का आना चुनौतीपूर्ण’, लोकसभा में बोले पीएम मोदी     |   ‘ईरान जंग से प्रभावित सभी देशों के साथ हमारे संबंध अच्छे’, लोकसभा में बोले PM मोदी     |  

CM रेखा गुप्ता ने किया ऐतिहासिक कोर्टरूम का उद्घाटन, शहीद भगत सिंह की प्रतिमा का किया अनावरण

शहीद दिवस के अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को संसद मार्ग स्थित रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी (RCS) कार्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक अदालत (Historic Courtroom) के पुनर्निर्मित परिसर का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अन्य मंत्रियों के साथ भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आज का दिन हम सभी के लिए गर्व का दिन है। 23 मार्च, जिसे हर साल शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, हमें उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।” उन्होंने इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यही वह जगह है जहां असेंबली बम कांड के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का मुकदमा चला था। आज भी यह परिसर लगभग वैसा ही है जैसा उस समय था। मेरा मानना है कि हर भारतीय को यहां आकर इसे जरूर देखना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रयास शहीद-ए-आजम भगत सिंह से जुड़ी यादों को नए रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा, “आज हम अपने शहीदों को नमन करते हुए संकल्प लेते हैं कि देश हमेशा उनके बलिदान को याद रखेगा।”दिल्ली के मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने भी इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह वही स्थान है जहां ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे गूंजे थे और भगत सिंह का मुकदमा चला था। यहां उनकी प्रतिमा स्थापित कर युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी दी गई थी। उनके बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है।