दिल्ली में दशहरे के जश्न के बाद बुधवार सुबह वायु प्रदूषण बढ़ गया। राजधानी के कई इलाकों में धुंध की मोटी परत छाई रही और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 238 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, इस सीजन में पहली बार दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंची है।
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 238 रहा। मंगलवार शाम 4 बजे यह 179 दर्ज किया गया था। यानी कुछ ही घंटों में AQI में 59 अंकों की बढ़ोतरी हुई।
दो इलाकों में AQI 300 के पार
दिल्ली के 59 में से 56 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी में AQI 308 और पूसा में 314 दर्ज किया गया। इन दोनों इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई।
वहीं, आनंद विहार समेत 16 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम में बदलाव, तापमान में गिरावट और हवा की गति में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो रहे हैं। इससे प्रदूषण को फैलने और कम होने में परेशानी हो रही है।
जुलाई के बाद पहली बार खराब हुई हवा
दिल्ली में इससे पहले 12 और 13 जुलाई को वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई थी। उस दौरान AQI क्रमशः 261 और 246 रहा था। अक्टूबर में अब तक राजधानी की हवा ज्यादातर मध्यम श्रेणी में बनी हुई थी। 12 और 16 अक्टूबर को हुई हल्की बारिश से भी प्रदूषण कम करने में मदद मिली थी।
आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 187, 19 अक्टूबर को 139 और 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे 179 दर्ज किया गया था। अब इसमें अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है।
AQI की श्रेणियां क्या हैं?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
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0–50: अच्छी
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51–100: संतोषजनक
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101–200: मध्यम
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201–300: खराब
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301–400: बेहद खराब
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401–500: गंभीर
मध्यम श्रेणी की हवा भी फेफड़ों, अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में परेशानी दे सकती है।
सर्दियों में बढ़ सकती है प्रदूषण की समस्या
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ना एक बड़ी समस्या रही है। इस दौरान मौसम की स्थिति और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों के कारण हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ सकती है।
5 अक्टूबर को भी दिल्ली का AQI 187 दर्ज किया गया था, जो करीब 83 दिनों में सबसे अधिक था। उस समय उपलब्ध निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में PM10 प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया था।
दशहरे के बाद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी होगा। खासकर सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्रदूषण के बढ़ते स्तर के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।