हाल ही में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारतीय महिलाओं में PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) और PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लाइफस्टाइल बदलने, गलत खानपान और स्ट्रेस की वजह से अब 20 से 35 साल की उम्र की महिलाएं इसके सबसे अधिक प्रभावित समूह में हैं।
PCOS और PCOD में क्या अंतर
PCOD (Polycystic Ovarian Disease): यह एक सामान्य स्थिति है जिसमें अंडाशय में छोटी-छोटी सिस्ट बन जाती हैं। यह समय के साथ नियंत्रित हो सकती है और लाइफस्टाइल में बदलाव से सुधारी जा सकती है।
PCOD के सामान्य लक्षण
- अनियमित मासिक धर्म या मासिक धर्म का रुक-रुक कर आना
- वजन बढ़ना, खासकर पेट और कमर के आसपास
- हल्के-मध्यम मुंहासे
- थकान या कमजोरी महसूस होना
- कभी-कभी बालों का हल्का बढ़ना चेहरे या शरीर पर
PCOS (Polycystic Ovary Syndrome): यह एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम है। इसमें अंडाशय में सिस्ट बनने के साथ हार्मोन असंतुलन भी होता है। PCOS का इलाज कठिन हो सकता है और यह लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
PCOS के सामान्य लक्षण
- मासिक धर्म में बड़ी अनियमितता या लंबे समय तक बंद होना
- अत्यधिक बालों का बढ़ना (चेहरे, छाती, पीठ)
- मुंहासों का ज्यादा बढ़ना और त्वचा का तैलीय होना
- बाल झड़ना या पतले होना
- वजन तेजी से बढ़ना और मोटापा, खासकर पेट के आसपास
- इंसुलिन रेसिस्टेंस, डायबिटीज या हार्मोनल असंतुलन की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें तो तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय रहते उपचार से महिलाओं की जीवनशैली बेहतर की जा सकती है और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्ट्रेस कम करने वाली आदतें PCOS/PCOD के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।