प्रवर्तन निदेशालय आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव के बेटे करुमुरी सुनील कुमार को कथित शराब परिवहन अनियमितता मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है। यह गिरफ्तारी आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान शराब परिवहन ठेकों के आवंटन और क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच हुई है।
गिरफ्तारी से सात दिन पहले, 11 जून को ED के हैदराबाद कार्यालय ने मामले से जुड़े पांच ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें करुमुरी सुनील कुमार, उनके पिता करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव, कथित शराब घोटाले के मास्टरमाइंड केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, आंध्र प्रदेश सरकार के पूर्व आईटी सलाहकार, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी (पूर्व प्रबंध निदेशक, APSBCL), विजय नरसिम्हा रेड्डी और वल्लू संदीप के परिसरों को शामिल किया गया था।
छापेमारी के दौरान ED ने एक लग्जरी कार, 94.5 लाख रुपये मूल्य की महंगी घड़ियां, बेहिसाबी नकदी तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। इनमें संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते, नकद लेन-देन के रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। मामले की जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह शिकायत राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव (विजिलेंस) की ओर से दर्ज कराई गई थी, जिसमें सरकारी खजाने को 195.33 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया गया है।
ED के अनुसार, आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APSBCL) की शराब परिवहन निविदा (टेंडर) की शर्तों में जानबूझकर बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। इनमें सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (SSCSPL) और बाद में प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स शामिल थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि ये कंपनियां केवल मुखौटा (फ्रंट) इकाइयों के रूप में काम कर रही थीं, जबकि वास्तविक संचालन और वित्तीय नियंत्रण केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी और उनके सहयोगियों के पास था।
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित शराब कार्टेल ने आंध्र प्रदेश में डिपो से खुदरा दुकानों तक शराब पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था के जरिए अवैध कमाई का तंत्र विकसित किया था। एजेंसी के मुताबिक, केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी और अंजनी कुमार ने डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के साथ मिलीभगत कर बाजार दरों से कहीं अधिक दरों पर परिवहन ठेका हासिल किया, जिससे कथित रूप से अपराध से अर्जित आय उत्पन्न हुई। ED ने मामले में जांच जारी होने की बात कही है और आगे भी अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।