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केरल में हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करें, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश

New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को केरल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) के बाद प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे से हटाए गए नामों को सार्वजनिक करने का गुरुवार को निर्देश दिया, ताकि प्रभावित मतदाता आपत्ति दर्ज करा सकें।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग से नामों को हटाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा को अधिकतम दो सप्ताह तक बढ़ाने पर विचार करने को भी कहा। आयोग की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि समय सीमा बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। पीठ, केरल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ताओं में केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के वरिष्ठ राजनेता पीके कुन्हालीकुट्टी, सीपीआई (एम) के एमवी गोविंदन मास्टर और सनी जोसेफ के साथ-साथ सीपीआई राज्य परिषद के सदस्य शामिल हैं। याचिकाओं में कहा गया कि वर्तमान में जिस प्रकार से एसआईआर प्रक्रिया चलाई जा रही है, उसमें तकनीकी त्रुटियों और एक मजबूत निवारण तंत्र के अभाव के कारण आबादी के एक बड़े हिस्से के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान बताया कि संशोधन के बाद जारी की गई मतदाता सूची के मसौदे के अनुसार, लगभग 24 लाख नाम हटा दिए गए हैं। पीठ को सूचित किया गया कि पिछली सुनवाई के दौरान आयोग ने जनगणना प्रपत्र जमा करने की मूल समय सीमा चार दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी थी। बाद में न्यायालय की टिप्पणियों के आधार पर समय सीमा को बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दिया गया।

पीठ ने इन दलीलों पर ध्यान देते हुए कहा कि मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों के नाम, अगर पहले से प्रदर्शित नहीं किए गए हैं, तो ग्राम पंचायत कार्यालयों या गांवों में स्थित किसी अन्य सार्वजनिक कार्यालय में प्रदर्शित किए जाने चाहिए।

न्यायालय ने ये भी निर्देश दिया कि व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ऐसी सूचियां आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएं। पीठ ने कहा, “इस बीच, आम जनता को हो रही कठिनाई को ध्यान में रखते हुए आयोग तिथि बढ़ाने की उपयुक्तता पर विचार कर सकता है।”