New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के सामान्य तरीके से न चल पाने और विपक्ष के हंगामे के बीच कई विधेयकों के बिना चर्चा पारित होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के युवा और होनहार सांसदों को चर्चा में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिल पाता, क्योंकि पार्टी का नेतृत्व 'असुरक्षित' महसूस करता है।
यह टिप्पणी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय में हुई सत्र के समापन के बाद आयोजित गैर-औपचारिक बैठक में की गई, जिसमें विभिन्न दलों के नेता शामिल होते हैं। हालांकि इस बार विपक्षी दलों ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा बिहार में चलाए जा रहे विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर हो रहे कांग्रेस के विरोध का जिक्र करते हुए उनका इशारा स्पष्ट रूप से उन्हीं की ओर था।
प्रधानमंत्री ने खासतौर पर ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन और रेगुलेशन) विधेयक का ज़िक्र किया, जो सभी रियल-मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाता है। यह बिल भी शोरगुल के बीच बिना चर्चा के पारित हुआ। उन्होंने कहा कि इस बिल का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि ऐसे गेम्स का नुकसानदेह प्रभाव युवाओं पर देखा गया है।
बैठक में मौजूद एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि कांग्रेस को विश्वास में लेना अब मुश्किल हो गया है क्योंकि पार्टी के कुछ नेता जो सरकार से संपर्क में रहते हैं, वह पार्टी के निर्णयों को प्रभावित नहीं कर पाते। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष में कुछ तेजतर्रार युवा सांसद हैं, जो शायद पार्टी नेतृत्व को 'असुरक्षित' महसूस कराते हैं। प्रधानमंत्री पहले भी सार्वजनिक मंचों से गांधी परिवार पर यह आरोप लगा चुके हैं कि वह पार्टी से ऊपर परिवार को प्राथमिकता देते हैं।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों द्वारा बैठक से किनारा करने पर कहा कि वे शायद अपने व्यवहार से शर्मिंदा थे, इसलिए बैठक में नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता सरकार से बातचीत करते हैं और सहमति बनती भी है, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जाता, शायद उन पर दबाव होता है।
गौरतलब है कि मानसून सत्र की शुरुआत 21 जुलाई से हुई थी और पूरे सत्र में विपक्ष ने हंगामा किया, खासकर बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर। इसके बावजूद सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया और कई बिल पास करवा लिए। बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कुछ अन्य दलों के सांसद मौजूद रहे। स्पीकर द्वारा आयोजित सत्र समापन की चाय पर होने वाली बैठक में विपक्षी नेताओं का बायकॉट करना दुर्लभ माना गया।