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DDMA ने यमुना किनारे बसे 310 परिवारों को भेजा नोटिस, 15 दिन बाद होगा बुलडोजर एक्शन

यमुना में बाढ़ के खतरे और जन सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र के पास रहने वाले लोगों को बेदखली नोटिस जारी किए हैं। प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का हवाला दिया है। पुरानी दिल्ली के अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM) द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, यमुना बाजार के पास स्थित लगभग 310 मकानों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की बाढ़ क्षेत्र भूमि पर अवैध अतिक्रमण के रूप में चिन्हित किया गया है।

प्रशासन ने कहा कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान यह इलाका हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, जिससे मानव जीवन, पशुधन और संपत्ति को गंभीर खतरा बना रहता है। नोटिस में निवासियों को 15 दिनों के भीतर क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपने सामान और ढांचों को स्वेच्छा से हटाने को भी कहा गया है।

इससे पहले राजधानी को यमुना में बार-बार आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने रिंग रोड के संवेदनशील हिस्से पर बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की थी कि मजनू का टीला से ओल्ड रेलवे ब्रिज (ORB) तक 4.72 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई जाएगी, जिसे अगले मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय शहर में बार-बार आई गंभीर बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यह दीवार बनने के बाद यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोका जा सकेगा। इससे सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा मिलेगी, जो जलस्तर बढ़ने पर सबसे अधिक प्रभावित होते रहे हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, दशकों से मजनू का टीला के निचले इलाकों से बाढ़ का पानी शहर में प्रवेश करता रहा है, जिससे रिंग रोड के हिस्से जलमग्न हो जाते हैं और दिल्ली की सामान्य जिंदगी ठप पड़ जाती है। 1978 की विनाशकारी बाढ़ से लेकर 2023 और 2025 की हालिया बाढ़ तक यह क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील बना रहा है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि मौजूदा तटबंध भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए दीर्घकालिक और मजबूत समाधान अपनाना जरूरी हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जिसने 1978 का पिछला रिकॉर्ड भी पार कर दिया था।