तिरुवनंतपुरम, चार नवंबर (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों की उन अर्जियों पर बारीकी से विचार करेंगे, जिनमें उन्होंने अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए और समय मांगा है।
‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में शामिल हुए इन सांसदों को जवाब देने के लिए दिया गया समय अब तक चार बार बढ़ाया जा चुका है।
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों में से कुछ ने लोकसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर जवाब देने के लिए और समय मांगा है।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने यहां एक सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने आवेदन नहीं देखे हैं, लेकिन मुझे बताया गया है कि कुछ सांसदों ने समय बढ़ाने का अनुरोध करते हुए आवेदन दिए हैं। मैं उनके आवेदनों की जांच करूंगा। मैं देखूंगा कि क्या नियमों के तहत और समय दिया जा सकता है और यदि ऐसा संभव है तो कितनी बार।’’
उच्चतम न्यायालय ने 23 सितंबर को कहा था कि उसे उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष एनसीपीआई में शामिल हुए टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिका पर शीघ्र फैसला करेंगे।
पिछले महीने बिरला ने कहा था कि सांसदों के जवाब मिलने के बाद वह दोनों पक्षों को सुनेंगे और प्रक्रिया में तेजी लाएंगे।
लोकसभा में टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए अध्यक्ष को 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं।
उन्होंने दलील दी थी कि सांसदों ने दूसरी पार्टी में शामिल होकर स्वेच्छा से टीएमसी की सदस्यता छोड़ दी, इसलिए वे अयोग्य ठहराए जाने के पात्र हैं।
बनर्जी ने अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया था कि टीएमसी के अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दी जाए।
इसके बाद टीएमसी नेता ने सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता संबंधी कार्यवाही पर फैसला करने में देरी का आरोप लगाते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
उन्होंने न्यायालय से अध्यक्ष को संविधान के दलबदल रोधी प्रावधानों के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा था कि उसे पता है कि वह लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकती, ‘‘लेकिन हम उन्हें शीघ्र फैसला करने की याद दिलाना चाहते हैं।’’
यह विवाद टीएमसी के संसदीय दल में बगावत के बाद शुरू हुआ। पार्टी के 20 लोकसभा सदस्यों ने घोषणा की थी कि वे एनसीपीआई नामक एक कम चर्चित राजनीतिक दल में शामिल हो गए हैं या उनका उसमें विलय हो गया है। उन्होंने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।
इसके बाद संसद में बागी सांसदों को एनसीपीआई समूह के रूप में माना गया और उन्होंने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की संसदीय गतिविधियों में हिस्सा लिया।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश