Breaking News

'दिल्ली की हवा में 30 सिगरेट पीने जैसा जोखिम झेल रहे लोग', प्रदूषण पर SC ने कहा     |   UP पुलिस को मिले 4,543 नए दरोगा, CM योगी ने बांटे नियुक्ति पत्र     |   पटना में पुलिस-STF का बड़ा एक्शन, मुठभेड़ में 3 अपराधी ढेर     |   योगी सरकार का बड़ा फैसला, आपदा में मौत पर अब परिवार को मिलेंगे 8 लाख रुपये     |   हिमाचल प्रदेश में तड़के सुबह भूकंप के झटके, चंबा में दर्ज हुई 3.2 तीव्रता     |  

महादेव सट्टा ऐप मामला: सौरभ चंद्राकर को आठ दिन के लिए सीबीआई की हिरासत में भेजा गया

रायपुर, चार नवंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की एक विशेष अदालत ने छह हजार करोड़ रुपये के 'महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप' मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार को आठ दिन के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में भेज दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि चंद्राकर को हाल ही में ओमान से भारत लाया गया था। सोमवार को उसे दो दिन के लिए सीबीआई की ट्रांजिट रिमांड पर भेजा गया था, क्योंकि जांच एजेंसी उसे छत्तीसगढ़ लाकर इस मामले की सुनवाई कर रही अदालत के सामने पेश करना चाहती थी।

उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम को उसे विमान से रायपुर लाया गया।

बचाव पक्ष के वकील तुषार गिरि ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बुधवार को चंद्राकर को रायपुर में सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर की अदालत में पेश किया गया, जहां सीबीआई ने उसकी 10 दिन की हिरासत की मांग की थी।

उन्होंने बताया कि अदालत ने आरोपी को आठ दिन के लिए केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने सीबीआई को पूछताछ के लिए चंद्राकर को दिल्ली ले जाने की भी अनुमति दे दी है।

गिरि ने बताया कि अदालत ने बचाव पक्ष की कुछ मांग मान लीं, जिनमें चंद्राकर के वकीलों और परिवार के सदस्यों को उससे मिलने की अनुमति देना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि उससे पूछताछ सीसीटीवी निगरानी में हो।

बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण कानूनों को लेकर एक कानूनी आपत्ति भी जताई। उनकी दलील है कि चंद्राकर का प्रत्यर्पण प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले के संबंध में हुआ था, न कि सीबीआई के मामले में।

गिरि ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधियों के तहत, किसी व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके लिए उसका प्रत्यर्पण किया गया हो। इस मामले में, चंद्राकर का प्रत्यर्पण ईडी के मामले में हुआ था, न कि सीबीआई के मामले में।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बचाव पक्ष कोई अनावश्यक आपत्ति नहीं जताना चाहता और न ही ऐसा कोई संदेश देना चाहता है कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे।

चंद्राकर की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं को खारिज करते हुए गिरि ने कहा कि मीडिया ने इस मुद्दे को बेवजह विवादित बना दिया है।

उन्होंने कहा, “यह मामला एक सट्टेबाजी ऐप से जुड़ा है। दुनिया के कई हिस्सों में यह गतिविधि कानूनी है, लेकिन भारत में यह गैर-कानूनी है। हाल तक, कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां - जिनके प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की तरह साधारण पृष्ठभूमि से नहीं आते थे - इतनी प्रभावशाली हो गई थीं कि भारतीय क्रिकेट टीम की ड्रेस पर भी उनके लोगो थे।”

उन्होंने कहा कि शायद चंद्राकर को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य से हैं।

सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान पता चला है कि 'महादेव ऑनलाइन बुक' देश के सबसे बड़े गैर-कानूनी ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था।

आरोप है कि इसे भारत के बाहर से चलाया जाता था।

सीबीआई ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य आयोजनों पर सट्टेबाजी की सुविधा देता था। यह पूरे देश में अपने नेटवर्क के जरिए उपयोगकर्ताओं को जोड़ता था और दांव की रकम इकट्ठा करता था।

एजेंसी का आरोप है कि गैर-कानूनी सट्टेबाजी से अर्जित धन को कई 'म्यूल' बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था और फिर हवाला के जरिए इसे विदेश भेज दिया जाता था।

सीबीआई के मुताबिक, इस कमाई का कुछ हिस्सा सरकारी अधिकारियों को 'प्रोटेक्शन मनी' के तौर पर भी दिया जाता था, ताकि यह सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के काम करता रहे।

ईडी 'महादेव ऐप' से जुड़े कथित धनशोधन मामले की जांच कर रही है। यह मामला छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आया था।

ईडी ने पहले दावा किया था कि उसकी जांच में राज्य के कई बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों की संलिप्तता का पता चला है।

राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने मार्च 2024 में ईडी की रिपोर्ट के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल, ऐप के प्रवर्तक रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल कुमार अग्रवाल के साथ-साथ 14 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

बाद में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

ईडी ने इस कथित घोटाले में अपराध से अर्जित धन का अनुमान लगभग छह हजार करोड़ रुपये लगाया है और भारत व विदेश में इस सिंडिकेट से जुड़ी कई संपत्तियां कुर्क की हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को चंद्राकर के प्रत्यर्पण को एक बड़ी कामयाबी बताया था।

उन्होंने कहा था कि उससे पूछताछ करने पर उन लोगों की पहचान सामने आ सकेगी, जिन्हें कथित तौर पर सट्टेबाजी सिंडिकेट से 'प्रोटेक्शन मनी' (सुरक्षा के नाम पर वसूली) ली है।

भाषा संजीव जोहेब

जोहेब