नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह 25 नवंबर को उन मुकदमों पर सुनवाई करेगा, जो केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब को सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ के परिसर से बेदखल करने की कार्रवाई के खिलाफ दायर किए गए हैं।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने बताया कि उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ पहले ही यह आदेश दे चुकी है कि संपदा अधिकारी ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदार बेदखली) अधिनियम’ के तहत कार्यवाही जारी रख सकते हैं, लेकिन सुनवाई की अगली तारीख, यानी 17 नवंबर तक कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगे।
न्यायमूर्ति जैन ने मुकदमों को 25 नवंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि जिमखाना मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका में, संबंधित पीठ द्वारा पारित आदेश को देखते हुए, इस चरण में कोई और आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने शुरुआत में इन मामलों के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की थी। हालांकि, बाद में इसे बदलकर 25 नवंबर कर दिया गया, क्योंकि पहली तारीख वादियों में से एक के वकील के लिए सुविधाजनक नहीं थी।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्थायी वकील आशीष दीक्षित पेश हुए।
अदालत जिमखाना के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर दो अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई कर रही थी।
उन्होंने ‘भूमि एवं विकास कार्यालय’ (एल एंड डीओ) के 22 मई के आदेश के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं। इस आदेश में औपनिवेशिक दौर के क्लब के स्थायी पट्टे को रद्द कर दिया गया है और 'रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने' के आधार पर पांच जून तक जमीन वापस करने को कहा गया है।
सुनवाई के दौरान, अदालत ने गौर किया कि हालांकि संपदा अधिकारी ने कार्यवाही जारी रखी है, लेकिन संबंधित पीठ के 16 अक्टूबर के आदेश के बाद, उन्होंने अंतिम आदेश न पारित करने के निर्देश पर ध्यान दिया है।
अक्टूबर में, न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने दिल्ली जिमखाना क्लब के कई सदस्यों की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इन सदस्यों ने क्लब को अपने कब्जे में लेने के सरकार के फैसले और उसके बाद शुरू की गई बेदखली की कार्यवाही को चुनौती दी थी।
बताया गया है कि खुराना के मुकदमे को 500 से ज्यादा क्लब सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने एल एंड डीओ के संपदा अधिकारी द्वारा क्लब प्रबंधन को बेदखली के लिए जारी किए गए 29 जून के ‘कारण बताओ नोटिस’ पर रोक लगाने की मांग करते हुए आवेदन भी दायर किए हैं।
केंद्र ने पहले कहा था कि वह फिलहाल बेदखली के संबंध में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा।
केंद्र ने मुख्य मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि मुकदमों को खारिज किए जाने योग्य माना जाना चाहिए।
उसने कहा कि तीसरे पक्ष, अधिकारियों और क्लब के बीच जमीन के टुकड़े को लेकर तय हो चुके पट्टा विलेख से मिलने वाले अधिकारों को लागू होने से नहीं रोक सकते।
भाषा प्रशांत माधव
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