नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2030 के बाद 300 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य दिया है, जिस पर हम आगे बढ़ेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में कहा था, ‘‘अगले 10-11 वर्षों में हमारा प्रयास 500 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म (स्वच्छ) ऊर्जा क्षमता जोड़ने का होगा। यह लक्ष्य कुछ कठिन जरूर है, लेकिन मुझे देश की क्षमताओं पर भरोसा है और हम इसे हासिल करेंगे।''
यह लक्ष्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और देश अब तक 310 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल कर चुका है।
जोशी ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा, ‘‘हम 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल कर लेंगे। यह तय है। प्रधानमंत्री ने 2030 के बाद 300 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य भी दिया है, जिसके लिए हम योजना बनाएंगे।''
उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने को लेकर कोई सवाल नहीं है, बल्कि चुनौती नई जोड़ी जाने वाली नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लिए पारेषण लाइन की व्यवस्था करने की है।
जोशी ने कहा, ‘‘इसके लिए मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा गलियारे को मंजूरी दी है। इससे राज्यों और बिजली मंत्रालय के साथ समन्वय कर क्षमता बढ़ेगी।’’
लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा, ''हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती।’’
नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से अपनाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में जोशी ने कहा, ''पारेषण में समय लग रहा है...। पारेषण लाइन बिछाने में तीन, चार और यहां तक कि पांच साल से अधिक का समय लग जाता है।...हम इसी समस्या से निपटने की कोशिश कर रहे हैं।’’
छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि अब हर एक लाख संयंत्र लगाने में छह दिन लग रहे हैं और आने वाले दिनों में ‘‘हम इसे पांच दिन, चार दिन तक लाना चाहते हैं। हम यही गति हासिल करना चाहते हैं।’’
नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों को भुगतान में देरी के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा कि कुछ राज्य समय पर भुगतान करते हैं, जबकि कुछ ऐसा नहीं करते।
उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रावधान हैं। यदि राज्य समय पर भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें ब्याज और जुर्माना देना पड़ता है। ये प्रावधान लागू हैं और राज्य आसानी से इससे बच नहीं सकते।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के लिए परियोजना को व्यावहारिक बनाने की 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘यह नवीकरणीय ऊर्जा के जरिये पंप भंडारण और बैटरी भंडारण के लिए है। यह बहुत अच्छा कदम है और इससे नवीकरणीय ऊर्जा को भी मदद मिलेगी, क्योंकि दिन के समय बिजली का उत्पादन जरूरत से अधिक होता है।’’
भाषा रमण अजय
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