(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) आगरा रेलवे मंडल के मंडलीय मुख्य नियंत्रक समेत तीन अधिकारियों ने उसी विभाग के एक अन्य अधिकारी अभिषेक सिंह कुशवाहा की आत्महत्या से कुछ दिन पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने का विकल्प चुना था। कुशवाहा की मौत के बाद उनके परिवार ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
मंडलीय मुख्य नियंत्रक ने 15 अक्टूबर को अपने आवेदन में वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार और मौजूदा कार्य वातावरण के कारण मानसिक तनाव को वीआरएस मांगने की वजह बताया था। वहीं, अन्य दो नियंत्रकों ने 30 अक्टूबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया था।
विभाग के 23 सेक्शन नियंत्रकों ने हाल में एक लिखित शिकायत देकर कामकाज की बिगड़ती परिस्थितियों, साप्ताहिक अनिवार्य विश्राम के वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन और ड्यूटी के बेहद अनियमित एवं अनिश्चित समय-सारणी समेत कई मुद्दे उठाए हैं।
इस संबंध में संपर्क किए जाने पर मंडल की ओर से आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। रेलवे मंडल का नियंत्रण विभाग उसका प्रमुख केंद्र होता है।
यहां रेलगाड़ियों के परिचालन, रखरखाव की योजना, निगरानी और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों से जुड़े फैसले लिए जाते हैं और उन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाती है।
आगरा में नियंत्रण विभाग का नेतृत्व वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (समन्वय) करते हैं। कुशवाहा के परिवार ने उन पर मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
आगरा रेलवे मंडल में सहायक परिचालन प्रबंधक (एओएम) के पद पर कार्यरत अभिषेक सिंह कुशवाहा एक नवंबर को रात करीब 11 बजे मंडलीय कार्यालय स्थित एक कक्ष में मृत पाए गए थे।
कुशवाहा की पत्नी और मां ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल के विषाक्त माहौल और वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (समन्वय) द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के कारण उन्होंने आत्महत्या की।
अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर, एक नियंत्रक ने यह भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन पर विभाग की कार्य-संस्कृति की तारीफ करने का दबाव डाला जा रहा है। ऐसा विशेष रूप से तब हो रहा है, जब कथित आत्महत्या की घटना के बाद आगरा डिवीजन जांच के दायरे में आ गया है।
भाषा संतोष नरेश
नरेश