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न्यायालय ने पटना उच्च न्यायालय से आरोपी ठेकेदार की जमानत याचिका पर निर्णय लेने को कहा

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पटना उच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश से बिहार के ठेकेदार रिशु श्री की जमानत याचिका पर फैसला करने का अनुरोध किया। रिशु श्री राज्य में सरकारी निविदाओं में कथित कमीशनखोरी से जुड़े धनशोधन मामले में पिछले पांच महीने से जेल में बंद हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे की दलीलों पर गौर किया।

दवे ने कहा कि मामले में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है इसके बावजूद उनका मुवक्किल पिछले पांच महीने से जेल में है।

पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से जमानत याचिका को संबंधित पीठ के समक्ष एक महीने के भीतर सूचीबद्ध करने का अनुरोध करेगी ताकि सुनवाई और फैसला किया जा सके।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 16 जून को रिशु श्री को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था। उन पर बिचौलिये के रूप में काम करने और बिहार सरकार के ठेके खास कंपनियों को दिलाने में मदद करने के लिए कुल निविदा राशि पर कमीशन लेने का आरोप है।

पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अगले चार सप्ताह तक उन्हें गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश ने तब कहा था, ‘‘हम चार सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करते हैं और उन्हें पटना उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने की छूट देते हैं। उच्च न्यायालय से अनुरोध है कि वह संरक्षण की अवधि के भीतर जमानत याचिका पर फैसला करे।’’

हालांकि, पीठ ने 18 मई के उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसमें आरोपी की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई थी। बाद में ठेकेदार को इस मामले में हिरासत में ले लिया गया था।

ईडी ने आरोप लगाया कि रिशु श्री बिचौलिये के रूप में काम करता था और खास कंपनियों को ठेके दिलाने में मदद करने के लिए कुल निविदा राशि का पांच से सात प्रतिशत कमीशन लेता था।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश