भुवनेश्वर, चार नवंबर (भाषा) ओडिशा सरकार आपदाओं के दौरान भूस्खलन से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए पहाड़ियों की चोटियों और तलहटी में बसे गांवों को दूसरी जगह बसाने की योजना बना रही है। राज्य के वरिष्ठ मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
राज्य में चक्रवात अर्नब के दौरान छह लोगों की मौत हुई जिनमें से पांच लोगों की मृत्यु कंधमाल और गंजाम जिलों में भूस्खलन के कारण हुई। गंजाम में भूस्खलन की चपेट में आए 10 अन्य लोग अब भी लापता हैं।
गंजाम और कंधमाल जिलों की सीमा पर स्थित गिड़ीपाबाली गांव पिछले सप्ताह चक्रवात के कारण हुई बारिश के बाद पहाड़ियों से भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा नीचे आने से पूरी तरह मलबे में दब गया। इस गांव में करीब 26 लोग रहते थे।
पुजारी ने बताया कि भूस्खलन के लिहाज से अत्यधिक जोखिम वाली बस्तियों की पहचान के लिए व्यापक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से गजपति और कंधमाल जैसे भूस्खलन संभावित जिलों पर ध्यान दिया जा रहा है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि अकेले गजपति जिले में करीब 150 स्थान भूस्खलन की आशंका वाले हैं।
पुजारी ने बताया कि ओडिशा के अधिकारियों ने हाल में पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा जोखिम कम करने के स्थापित तरीकों का अध्ययन करने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा भी किया था।
इस बीच, मलकानगिरि जिले से जानकारी मिली है कि पिछले तीन दिनों से जारी बारिश के कारण बुधवार को माथिली ब्लॉक की पुरीगुड़ा पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ।
एक अधिकारी ने बताया कि मिट्टी के साथ बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
भूस्खलन का स्थान पुरीगुड़ा गांव से कुछ मीटर की दूरी पर था, लेकिन और भूस्खलन की आशंका के चलते स्थानीय लोगों ने अपने घर खाली कर दिए हैं।
भाषा संतोष नरेश
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