(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने बुधवार को कहा कि काशी विश्वनाथ और रामेश्वरम के बीच का संबंध उस सांस्कृतिक एकता एवं राष्ट्रीय अखंडता को दर्शाता है, जो हमारे देश में हजारों वर्ष से मौजूद रही है।
राज्यपाल मद्रास में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित पांचवें काशी तमिल संगमम (केटीएस 5.0) के उद्घाटन-पूर्व कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का पांचवां संस्करण 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। इस बार कार्यक्रम का ध्येय वाक्य ‘तिरुक्कुरल पढ़ें’ रखा गया है।
कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित प्रसिद्ध तमिल शास्त्रीय ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' में 1,330 दोहे हैं, जिन्हें 'अरम' (सदाचार), 'पोरुल' (धन/अर्थ) और 'इनबम' (प्रेम) नामक भागों में बांटा गया है। इसमें नैतिक आचरण, शासन-व्यवस्था, मानवीय संबंधों और धर्मपूर्ण जीवन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
अर्लेकर ने कहा, ‘‘काशी और तमिलनाडु हमेशा से सांस्कृतिक, पारंपरिक एवं ऐतिहासिक रूप से जुड़े रहे हैं। हमारे पूर्वजों में न केवल अपने देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था थी, बल्कि उन्हें विज्ञान और तकनीक का भी ज्ञान था। काशी विश्वनाथ और रामेश्वरम के बीच के संबंध उस सांस्कृतिक एकता एवं राष्ट्रीय अखंडता को दर्शाते हैं, जो हमारे देश में हजारों वर्षों से मौजूद रही हैं।’
काशी तमिल संगमम 5.0 में तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। वे लगभग 200 प्रतिभागियों के सात समूहों में यात्रा करेंगे। प्रत्येक समूह आठ दिवसीय यात्रा करेगा, जिसमें सांस्कृतिक, शैक्षणिक और विरासत संबंधी गतिविधियां शामिल होंगी।
पहला काशी तमिल संगमम 2022 में आयोजित किया गया था।
भाषा राजकुमार माधव
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