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चुनाव में हार के बाद ट्रंप भारत के साथ जल्द व्यापार समझौता करने की कर सकते कोशिश: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ जल्द व्यापार समझौता करने की कोशिश कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

उन्होंने कहा कि रूस, चीन और ईरान के खिलाफ विदेश नीति के मोर्चे पर दबाव बनाने में नाकाम रहने के बाद ट्रंप को व्यापार समझौते के मोर्चे पर जल्द कोई बड़ी सफलता हासिल करने की जरूरत है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनाव में बड़ा झटका लगा है। देश के मतदाताओं ने मंगलवार को हुए बहुचर्चित मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद के उच्च सदन सीनेट का नियंत्रण सौंप दिया और डेमोक्रेट ने कई अहम राज्यों में गवर्नर पदों पर भी जीत दर्ज की।

इन नतीजों का असर न केवल अमेरिका, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि मध्यावधि चुनाव के प्रतिकूल नतीजों से राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीति की दिशा में बदलाव की संभावना नहीं है, क्योंकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों ही दल आर्थिक राष्ट्रवाद, घरेलू विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के पक्षधर हैं।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ''रूस, चीन और ईरान के खिलाफ विदेश नीति के मोर्चे पर दबाव बनाने में नाकाम रहने के बाद ट्रंप को जल्द किसी सफलता की जरूरत है। अमेरिका का प्रभाव दिखाने के लिए भारत पर व्यापार समझौता करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। मध्यावधि चुनाव में मिली हार ट्रंप को भारत के साथ जल्द समझौता करने के लिए प्रेरित कर सकती है।''

उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति अब अपने कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल कर भारत पर जल्द समझौता करने का दबाव बना सकते हैं। इसके तहत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच सुनिश्चित करने के साथ अमेरिकी कंपनियों को अन्य बड़ी रियायतें देने की मांग की जा सकती है।

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक प्रमुख बाजार बना हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले महीनों में भारतीय निर्यातकों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की शुल्क और बाजार तक पहुंच से जुड़ी नीतियां किस रूप में सामने आती हैं। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापार की भरोसेमंद परिस्थितियों की जरूरत है। इससे वे भरोसे के साथ अपने उत्पादों की कीमत तय कर सकेंगे और कई महीने पहले ही माल भेजने की योजना बना सकेंगे।

रल्हन ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का और विस्तार हो सकता है। भारतीय आपूर्तिकर्ताओं और अमेरिकी खरीदारों ने मजबूत कारोबारी संबंध बनाए हैं। दोनों देशों का इन संबंधों को और मजबूत करने में स्पष्ट हित है।’’

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में से एक है। दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध को मजबूत करने के लिए हम निरंतर बातचीत जारी रहने की उम्मीद करते हैं।

भंसाली ने कहा, ‘‘कांग्रेस की संरचना में बदलाव से विधायी माहौल और व्यापार नीति पर होने वाली चर्चाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, हमें उम्मीद है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में बनी गति जारी रहेगी। पहले लगाए गए शुल्क कार्यकारी स्तर पर उठाए गए कदम थे, उन्हें कांग्रेस में कानून बनाकर लागू नहीं किया गया था।''

भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया है। हालांकि, अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में बदलाव के कारण इस समझौते पर आगे बातचीत हो रही है। भारत अपने सामान पर प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम शुल्क लगाने की मांग कर रहा है।

भाषा रमण अजय

अजय