कोलकाता, चार नवंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध में अपना रुख नहीं बदलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से वर्षों तक किए गए ‘अत्याचार’ ने राज्य में उनकी पार्टी के संगठनात्मक आधार को नष्ट कर दिया।
चौधरी की यह टिप्पणी बनर्जी द्वारा एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली को संबोधित करने के तीन दिन बाद आई है।
बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत सोनिया गांधी को ‘मेरी नेता’ बताकर की थी, जिसके बाद कांग्रेस और टीएमसी के बीच व्यापक राजनीतिक समझ बनने की संभावना को लेकर नयी अटकलें शुरू हो गई थीं।
मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य ने कहा कि बनर्जी का विरोध पिछले 15 वर्षों के उनके राजनीतिक अनुभवों पर आधारित है और राष्ट्रीय स्तर पर हालिया घटनाक्रम से इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा।
चौधरी ने कहा, ‘‘पिछले 15 वर्षों में टीएमसी के अत्याचारों ने कांग्रेस को तबाह कर दिया है। टीएमसी ने ही दल-बदल कराने और धमकियां देने के जरिए बंगाल के विभिन्न हिस्सों से कांग्रेस का सफाया किया है। टीएमसी के अत्याचारों के कारण हमारा संगठनात्मक आधार टूट गया है। ये झूठे आरोप नहीं हैं। इसलिए, मैं ममता बनर्जी का विरोध वापस नहीं ले रहा हूं।’’
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दोनों दलों के बीच भावी संबंधों की दिशा को लेकर कोई अनुमान लगाने से परहेज किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह सकता कि भविष्य में क्या होगा। राष्ट्रीय नेतृत्व इस बारे में फैसला करेगा और राज्य का नेतृत्व भी मौजूद है। हम देखेंगे कि क्या होता है। उस समय मैं फिर अपनी बात रखूंगा।’’
चौधरी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में बनर्जी के मुखर राजनीतिक विरोधियों में से एक रहे हैं। वह अक्सर तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक हिंसा और डराने-धमकाने के जरिए कांग्रेस को कमजोर करने का आरोप लगाते रहे हैं।
चौधरी लगातार छह कार्यकाल तक लोकसभा में बहरामपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और गुजरात से लाए गए पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अपनी हार के लिए अल्पसंख्यक मतों के तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक ध्रुवीकरण को तेज करके उन्हें हराने के खास मकसद से पठान को उम्मीदवार बनाया था।
चौधरी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में भी बहरामपुर से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस हार के लिए भी इसी तरह के ध्रुवीकरण को जिम्मेदार ठहराया।
भाषा
संतोष नरेश
नरेश