(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग (ईसी) ने मंगलवार को कहा कि पूर्व में पंजीकरण करा चुके मतदाताओं के नाम यदि मसौदा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सूची में नहीं हैं तो वे अपना नाम शामिल कराने के लिए फार्म-छह जमा कर सकते हैं।
यह स्पष्टीकरण उन लोगों की चिंताओं के बीच आया है, जिनके नाम मसौदा एसआईआर सूची से हटा दिए गए हैं। उन्हें डर है कि फॉर्म छह जमा कराने पर की जाने वाली यह घोषणा झूठी घोषणा मानी जा सकती है कि आवेदक पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहता है। इसके लिए उसपर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में कुछ लोगों के नाम नहीं हैं और वे 'फॉर्म छह' जमा करने में हिचकिचा रहे हैं क्योंकि उन्हें इस फॉर्म में एक घोषणा-पत्र भी देना है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।
उसने कहा, ‘‘इसलिए, ऐसे मतदाताओं का मानना है कि पहले से पंजीकृत होने के बावजूद फॉर्म छह जमा करना एक झूठी घोषणा करने के समान होगा और इसके लिए वे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई के भागी बन सकते हैं।’’
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा एसआईआर सूची में नहीं हैं, वे अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम फिर से शामिल कराने के लिए फॉर्म छह जमा कर सकते हैं, भले ही वे पहले से पंजीकृत रहे हों।
उसने कहा कि जिन मामलों में मसौदा एसआईआर सूची से नाम हटा दिया गया था, वहां ‘फॉर्म छह’ जमा करना अपने आप में कोई झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 31 के तहत चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) केवल इस आधार पर कार्रवाई शुरू नहीं कर सकता कि कोई मतदाता, जो पहले से मतदाता सूची में शामिल था, उसने एसआईआर के दौरान या उसके बाद 'फॉर्म छह' जमा किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई तब तक नहीं की जा सकती, जब तक कि मतदाता कहीं और पंजीकृत न हो, या उसने कोई गलत या गैर-कानूनी घोषणा न की हो।
निर्वाचन आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि गलत घोषणा करने की आशंका निराधार थी।
भाषा
राजकुमार पवनेश
पवनेश