पटना, तीन नवंबर (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव के बिहार निवासी एक समर्थक की ओर से एक प्रमुख प्रकाशन गृह के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत का संज्ञान लेने वाली अधीनस्थ अदालत का आदेश मंगलवार को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने अक्टूबर 2017 में वैशाली जिले के मुख्यालय हाजीपुर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) द्वारा पारित दो आदेश रद्द कर दिए।
अधीनस्थ अदालत ने हाजीपुर निवासी अमित कुमार की शिकायत पर प्रमुख प्रकाशन गृह 'जगरनॉट बुक्स प्राइवेट लिमिटेड' को समन जारी किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पुस्तक 'गॉडमैन टू टाइकून: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ स्वामी रामदेव' में कुछ ऐसे अंश हैं, जिनसे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और उनके गुरु की मानहानि हुई है।
इसके बाद प्रकाशन गृह ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय का रुख किया था। इस धारा के तहत उच्च न्यायालय को अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई में बुनियादी कानूनी खामियां हैं।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई जारी रखने की अनुमति देने का मतलब होगा कि मामले का संज्ञान लेने के लिए कानून में निर्धारित अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं होने के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रखी जाए।
भाषा सं कैलाश सिम्मी
सिम्मी