जबलपुर, तीन नवंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के जबलपुर में 'ब्रेन डेड' घोषित 40 वर्षीय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के अंगदान से कम से कम चार लोगों को नयी जिंदगी मिलने की संभावना है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, अंगों को समय पर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। डुमना हवाई अड्डे तक बनाए गए एक कॉरिडोर के जरिए हृदय और यकृत को एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद भेजा गया, जबकि दूसरे कॉरिडोर के जरिए एक गुर्दे को प्रत्यारोपण के लिए जबलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टरों की विशेष टीम ने अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू की। मंगलवार तड़के करीब 3.50 बजे एंबुलेंस ने 17 किलोमीटर की दूरी 20 मिनट में तय कर हवाई अड्डे तक का सफर पूरा किया।
मेट्रो प्राइम अस्पताल के डॉक्टर राजीव बड़ेरिया ने बताया कि नरेंद्र की एक किडनी मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में और दूसरी मेट्रो प्राइम अस्पताल में प्रत्यारोपित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हृदय और यकृत अहमदाबाद के अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि नरेंद्र की आंखें और त्वचा भी दान की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अंगों को निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में अस्पताल के करीब 65 डॉक्टरों की टीम जुटी थी।
उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) मदन रघुवंशी ने 'पीटीआई-वीडियो' सेवा से बातचीत में बताया कि नरेंद्र रजक के परिजनों ने अंगदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसलिए अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
उन्होंने कहा कि परिवार के इस फैसले से कम से कम चार लोगों को नयी जिंदगी मिलना तय माना जा रहा है।
नरेंद्र रजक मूल रूप से जबलपुर के गुप्तेश्वर क्षेत्र के निवासी थे और नागपुर की एचसीएल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी पूजा रजक, 12 वर्षीय बेटी भूमिका और आठ वर्षीय बेटा देवांश हैं।
परिजनों के मुताबिक, नरेंद्र 31 अक्टूबर को एक रिश्तेदार के यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लौट रहे थे, तभी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद से मेट्रो प्राइम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया था। 'ब्रेन डेड' का अर्थ मस्तिष्क की सभी गतिविधियों का पूरी तरह और अपरिवर्तनीय रूप से बंद हो जाना है।
इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से अंगदान की संभावना पर चर्चा की। इस पर उनकी पत्नी पूजा रजक ने परिवार के साथ विचार-विमर्श कर अंगदान की सहमति दी।
पूजा रजक ने संवाददाताओं से कहा कि उनके परिवार की जिंदगी तो खत्म हो गई, लेकिन नरेंद्र के अंग किसी दूसरे परिवार में खुशियां लौटा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र का शरीर अब किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी बचाने के काम आएगा, यही उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा संतोष है।
पूजा ने लोगों से अपील की कि जिन मरीजों को 'ब्रेन डेड' घोषित किया जाता है, उनके परिजनों को अंगदान के बारे में जरूर विचार करना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर का मंगलवार शाम 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया।
भाषा
सं, ब्रजेन्द्र रवि कांत