नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) ने राष्ट्रीय राजधानी में एचआईएल (इंडिया) के स्वामित्व वाली 5.119 एकड़ जमीन को बाजार पर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए 829.69 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया गया है। यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की अतिरिक्त परिसंपत्तियों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।
यह पिछले दो महीनों में एनएलएमसी की ओर से घोषित तीसरी ई-नीलामी है। इससे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) की अतिरिक्त और कम उपयोग हो रही जमीन के मौद्रीकरण यानी बाजार पर चढ़ाने की सरकार की लगातार कोशिशों का पता चलता है।
वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग के अंतर्गत आने वाली एनएलएमसी ने मंगलवार को नयी दिल्ली में बोली से पहले की बैठक आयोजित की। इसका उद्देश्य संभावित बोलीदाताओं को संपत्ति की स्थिति, विकास की संभावनाओं, जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधानों, पात्रता संबंधी शर्तों और प्रस्तावित ऑनलाइन नीलामी के नियम एवं शर्तों से परिचित कराना था।
यह जमीन नयी दिल्ली के शिवाजी मार्ग स्थित रोहतक रोड पर नजफगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। इसके सामने करीब 140 मीटर सड़क है और यह दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन से जुड़ी हुई है।
एनएलएमसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रोहन चंद ठाकुर ने कहा, ‘‘भारत सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की अतिरिक्त और कम इस्तेमाल हो रही जमीन के मौद्रीकरण को काफी प्राथमिकता दी है। पिछले दो महीनों में एनएलएमसी की ओर से सार्वजनिक रूप से घोषित तीसरी ई-नीलामी इस प्राथमिकता को ठोस नतीजों में बदलने के हमारे निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।''
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं के जरिये सार्वजनिक परिसंपत्तियों का आर्थिक मूल्य हासिल करना और उनके उत्पादक इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
ठाकुर ने कहा, ‘‘रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान और विकास की संभावनाओं को देखते हुए एचआईएल की यह जमीन पात्र प्रतिभागियों को इसके भविष्य में उपयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर देती है। बोली-पूर्व बैठक से बोली प्रक्रिया में स्पष्टता, पारदर्शिता और पूरी जानकारी के साथ भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।''
एचआईएल (इंडिया) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कुलदीप सिंह ने कहा कि सीधे बिक्री के लिए पेश की जा रही यह जमीन कंपनी की एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस मौद्रीकरण पहल के जरिये हमारा उद्देश्य इस परिसंपत्ति के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही, संभावित विकासकर्ताओं और पात्र बोलीदाताओं को इसके भविष्य के विकास में भाग लेने का अवसर देना है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘हम इच्छुक प्रतिभागियों से नीलामी दस्तावेजों का अध्ययन करने और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह करते हैं।’’
इस संपत्ति का मौजूदा उपयोग औद्योगिक गतिविधियों के लिए निर्धारित है। हालांकि, लागू नियमों और मंजूरियों के अधीन इसके उपयोग में बदलाव किया जा सकता है। प्रस्तावित सौदे के तहत ऑनलाइन ई-नीलामी होगी और सबसे ऊंची बोली के आधार पर बिक्री मूल्य तय किया जाएगा। बोली एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के गुणक में लगाई जा सकेगी।
अधिकतम तीन सदस्यों वाला समूह भी बोली प्रक्रिया में हिस्सा ले सकता है।
बोलीदाताओं को अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) में तय प्रावधानों के अनुसार बैंक गारंटी या एनईएफटी/आरटीजीएस के जरिये बयाना राशि जमा करानी होगी।
बोली-पूर्व बैठक में एनएलएमसी, एचआईएल (इंडिया) और सौदे के सलाहकार सीबीआरई इंडिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने संपत्ति, नीलामी दस्तावेजों, तकनीकी और वित्तीय बोलियां जमा करने, पात्रता मानदंड तथा बोली प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
भाषा रमण अजय
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