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साइबर सुरक्षा से जु़ड़ी सूचनाएं साझा करने के लिए आईबीए बना रहा एक मंचः एसबीआई चेयरमैन

मुंबई, तीन नवंबर (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने मंगलवार को साइबर सुरक्षा को एक ‘गंभीर चिंता’ बताते हुए कहा कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) वित्तीय संस्थाओं के बीच साइबर हमलों से जुड़ी सूचनाओं को तेजी से साझा करने के लिए एक मंच तैयार कर रहा है।

शेट्टी ने कहा कि बैंकों का संगठन आईबीए अत्याधुनिक कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों से निपटने के तरीकों पर भी काम कर रहा है।

आईबीए के भी चेयरमैन शेट्टी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘आईबीए के तहत हम विभिन्न संस्थाओं के बीच सूचना साझा करने के लिए एक मंच तैयार कर रहे हैं। इससे किसी खास हमले के जवाब में सभी संस्थाएं जरूरी कदम उठा सकेंगी।’’

शेट्टी ने कहा कि फिलहाल बैंक साइबर हमलों से जुड़ी जानकारी नियामकों और कानून प्रवर्तन की जिम्मेदारी निभाने वाली सरकारी एजेंसियों के साथ साझा करते हैं, लेकिन बैंकों के बीच आपस में ऐसी जानकारी साझा करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ गए हैं।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारतीय बैंकों पर साइबर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। इनमें एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक भी शामिल हैं।

शेट्टी ने कहा कि भारतीय बैंक फिलहाल अत्याधुनिक एआई मॉडल का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, लेकिन इनसे पैदा होने वाले जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि साइबर अपराधी इन मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘एआई से एआई के खतरों का मुकाबला’ करने के क्रम में आईबीए एक ऐसा परीक्षण मंच बनाने पर विचार कर रहा है, जहां सभी प्रणालियों की कमजोरियों की जांच की जा सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें दूर करने के लिए नए सॉफ्टवेयर पैच सुझाए जा सकें।

शेट्टी ने साइबर सुरक्षा पर किए जाने वाले खर्च को लेकर जानकारी नहीं दी लेकिन यह कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर काम करने में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।

उन्होंने एसबीआई में कथित तौर पर करीब 3,900 ग्राहकों के डेटा चोरी होने की घटना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि सेंधमारी के मूल कारणों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं और इसमें कुछ समय लगेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा ध्यान सबसे पहले नुकसान को सीमित करने और इस सेंधमारी की वजह बनी कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर था। हमने साइबर सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक अभ्यास भी किया।’’

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय