नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने मंगलवार को खिलाड़ियों के लिए सरकारी और संस्थागत आर्थिक सहायता जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च काफी अधिक होता है और इसमें भी युवा खिलाड़ियों के सामने आर्थिक चुनौतियां ज्यादा हैं क्योंकि उन्हें न तो प्रायोजकों का पर्याप्त समर्थन मिलता है और न ही अपनी कोचिंग व सहयोगी टीम के साथ विदेश दौरे करने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन उपलब्ध होते हैं।
सिंधू और लक्ष्य सेन ने रविवार को जर्मनी में हाइलो ओपन का खिताब जीतकर अपने सफल यूरोपीय दौरे का समापन किया था। हालांकि बाद में यह खुलासा हुआ कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा दौरे का खर्च उठाने से इनकार करने के बाद खिलाड़ियों को फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में आयोजित चार टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने का खर्च खुद उठाना पड़ा था।
सिंधू ने ‘फंडिंग’ का मुद्दा सामने आने के एक दिन बाद टेनिस और बैडमिंटन में मिलने वाली इनामी राशि के अंतर को रेखांकित किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, ‘‘विंबलडन में पहले दौर में हारने वाले खिलाड़ी को भी 80,000 पाउंड मिलते हैं। वहीं, बैडमिंटन के सबसे अधिक पुरस्कार राशि वाले टूर्नामेंट में से एक चीन ओपन जीतने पर 1.40 लाख डॉलर मिलते हैं। अगर पहले दौर में हार जाएं तो केवल 2,000 डॉलर मिलते हैं। ’’
उन्होंने लिखा, ‘‘इसके बावजूद हमारे खर्च लगभग समान होते हैं। यात्रा, कोच, फिजियो, ट्रेनर और सहयोगी टीम पर होने वाला खर्च। इस असमानता को लेकर मेरी रोहन बोपन्ना से भी लंबी बातचीत हुई है। ’’
सिंधू ने कहा कि स्थापित खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने माना कि उन्हें शानदार प्रायोजकों का साथ मिला है, लेकिन हर खिलाड़ी को यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
उन्होंने तर्क दिया कि कमाई में अंतर होने के बावजूद बैडमिंटन खिलाड़ियों को विदेश यात्रा, कोच, फिजियो, ट्रेनर और अन्य सहयोगी स्टाफ पर लगभग उतना ही खर्च करना पड़ता है।
उन्होंने सरकार की ओर से खिलाड़ियों को मिल रहे सहयोग की सराहना की, साथ ही कहा कि इस सहायता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने लिखा, ‘‘मुझे यह स्वीकार करना चाहिए कि भारत सरकार और साइ ने वर्षों से हम जैसे खिलाड़ियों को शानदार सहयोग दिया है। भारतीय खेलों में उनके योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। ’’
सिंधू ने कहा, ‘‘जवाबदेही बेहद जरूरी है। लेकिन खिलाड़ियों का समर्थन करना व्यवस्था पर बोझ डालना नहीं है। यह भारत के खेल भविष्य में निवेश करना है। हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ’’
फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंचने वाली सिंधू ने कहा कि वह प्रायोजकों के सहयोग से अपने विदेशी दौरों के लिए धन की व्यवस्था कर सकती हैं, लेकिन हर खिलाड़ी के पास यह सुविधा नहीं है।
उन्होंने लिखा, ‘‘मैं अपने दौरे के लिए धन की व्यवस्था कर सकती हूं। लेकिन उस 18 वर्षीय खिलाड़ी का क्या जो अगली सिंधू या लक्ष्य बनने का सपना लेकर आगे बढ़ रही है? ’’
भाषा नमिता
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