देहरादून, तीन नवंबर (भाषा) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक पर करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण लापता पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के सात पर्वतारोहियों (ट्रेकर) तथा एक स्थानीय गाइड की तलाश के लिए चलाए जा रहे अभियान के चौथे दिन मंगलवार को दो लोगों के शव बरामद किए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उत्तरकाशी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की संयुक्त पर्वतीय बचाव टीम (एमआरटी) को बर्फ में दबे एक महिला और एक पुरुष के शव मिले, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
केंद्र के अनुसार, भारी बर्फबारी के कारण पूरे इलाके का बड़ा हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है। मंगलवार अपराह्न तीन बजे अभियान समाप्त करने के बाद टीम अपने आधार शिविर लौट गई। टीम बुधवार सुबह अन्य लापता लोगों की तलाश के लिए फिर अभियान शुरू करेगी।
इससे पहले, सोमवार को हेलीकॉप्टर के जरिए 10 सदस्यीय एमआरटी को केदारखंड (कच्ची ढांग) पहुंचाया गया था। तलाशी के दौरान टीम को संभावित स्थानों पर तंबू और कुछ अन्य सामान मिले थे। हालांकि, बाद में मौसम खराब होने के कारण अभियान रोक दिया गया था। मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे फिर से तलाशी शुरू की गई।
उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने हिमस्खलन और बर्फबारी को देखते हुए बरामद शवों को घटनास्थल से मातली हेलीपैड तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
उत्तरकाशी की अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि हिमस्खलन और बर्फबारी के कारण शवों को सड़क मार्ग तक लाना जोखिम भरा है। उन्होंने बताया कि बचाव दलों ने घटनास्थल के पास एक आपातकालीन हेलीपैड तैयार किया है। वहां से शवों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के मातली हेलीपैड तक पहुंचाने के लिए बुधवार सुबह हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग की अनुमति लेकर 27 अक्टूबर को 'सोल सीकर ट्रेकिंग एजेंसी' के माध्यम से सात पर्वतारोहियों और छह सहायक कर्मियों सहित 13 लोगों का दल गंगोत्री से केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था। इनमें से एक रसोइया बीच रास्ते से ही लौट आया था, जबकि शेष दल को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था। हालांकि, खराब मौसम, बर्फबारी और रास्ते में हिमस्खलन के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो सकी।
अधिकारियों के अनुसार, 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर संपर्क होने पर पर्वतारोहियों ने कच्ची ढांग के पास फंसे होने की जानकारी दी और वहां से निकलने में मदद मांगी।
इसके बाद ट्रेकिंग एजेंसी ने 30 अक्टूबर को ही पोर्टर और गाइड की एक टीम भेजकर करीब छह किलोमीटर तक रास्ता खोलने का काम किया। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने 31 अक्टूबर की सुबह बचाव अभियान शुरू किया और वन विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) सहित विभिन्न एजेंसियों की टीमों को मौके पर रवाना किया।
कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक रसोइये सहित चार लोग सुरक्षित मिल गए। हालांकि, हिमस्खलन और बर्फबारी के कारण रास्ता बंद होने से आठ अन्य लोगों का पता नहीं चल सका।
लापता पर्वतारोहियों में पांच पश्चिम बंगाल और दो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जबकि गाइड उत्तरकाशी जिले के उत्तरों गांव का निवासी है।
इस बीच, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण उत्तरकाशी जिले में गौमुख-तपोवन ट्रेक, लमखागा दर्रा और त्रिखंटा ट्रेक सहित चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक मार्गों पर आवाजाही रोक दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और उत्तरकाशी वन प्रभाग ने पर्यटकों एवं ट्रेकरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल नए परमिट जारी नहीं करने का फैसला किया है।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के उप निदेशक मयंक कुमार ने बताया कि 29 अक्टूबर को हुई बर्फबारी के बाद गौमुख-तपोवन ट्रेक पर काफी बर्फ जमा हो गई है। सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर आवाजाही बंद कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि केदारताल, कालिंदी खाल और उडनकोल आदि के लिए भी नए परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। मार्गों की स्थिति का आकलन करने और उनके सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद ही इन्हें दोबारा खोलने का निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, नेलांग घाटी और गरतांग गली पर्यटकों के लिए खुले हैं।
उत्तरकाशी के प्रभागीय वन अधिकारी जीवन मोहन दगड़े ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण ट्रेकिंग मार्गों पर आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक इन मार्गों के लिए अनुमति जारी नहीं की जाएगी।
भाषा
दीप्ति रवि कांत