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आतंकी वित्तपोषण मामला: एनआईए ने इंजीनियर रशीद की जमानत अर्जी का विरोध किया

नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद की जमानत अर्जी का मंगलवार को विरोध किया।

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि रशीद ने अभियोजन पक्ष के कुछ गवाहों को प्रभावित किया। उसने कहा कि अभियोजन पक्ष के दो गवाह, जो संरक्षित गवाह भी हैं, अपने बयानों से मुकर गए हैं।

एनआईए ने रशीद की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ के समक्ष ये दलीलें पेश कीं। पीठ ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि अब तक जिन गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, उनसे पता चलता है कि तीन गवाहों को रशीद ने प्रभावित किया है।

उन्होंने दलील दी कि कम से कम दो संरक्षित गवाह अपने बयानों से मुकर गए हैं।

लूथरा ने कहा कि रशीद ने भारत के खिलाफ विशेष रूप से भाषण दिए हैं और वह भारत-विरोधी गतिविधियों का समर्थन करते रहे हैं।

उन्होंने रशीद के खिलाफ दिए गए जमानत आदेशों का ब्योरा देते हुए कहा, “याचिकाकर्ता (रशीद) का जिस तरह का प्रभाव है, उसे देखते हुए वह जमानत पाने का हकदार नहीं है।”

लूथरा ने कहा कि जब रशीद को अपने बीमार पिता से मिलने के लिए जमानत दी गई थी, तो वह कुछ गवाहों से मिले थे।

रशीद के वकील ने प्रत्युत्तर में दलील दी कि उनके मुवक्किल पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है, क्योंकि वह ज्यादातर समय हिरासत में थे।

वकील ने कहा कि रशीद पर जिन गवाहों को प्रभावित करने का आरोप है, वे उनसे बहुत करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से एक रशीद का ड्राइवर है और बाकी दो निजी सहायक हैं, जो कई वर्षों से उनके लिए काम कर रहे हैं।

वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता संसद सदस्य हैं और उन्होंने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है, इसलिए यह मामला जमानत देने के लिए उपयुक्त है।

अदालत ने पहले कहा था कि रशीद लगभग सात साल से हिरासत में हैं और इस मामले में कुल 240 गवाह हैं, जिसके चलते मुकदमे को पूरा होने में काफी लंबा समय लगेगा।

रशीद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण के आरोप में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले रशीद को उनके पिता के अंतिम संस्कार से जुड़े अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए जमानत पर रिहा किया गया था।

एनआईए ने रशीद को आतंकी वित्तपोषण मामले में साल 2017 में गिरफ्तार किया था। वह 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद हैं।

भाषा पारुल नरेश

नरेश