मुंबई, तीन नवंबर (भाषा) देश में 97 प्रतिशत पेशेवर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े अपने कौशल को और विकसित करना चाहते हैं, जबकि 88 प्रतिशत पेशेवरों को इस प्रौद्योगिकी से अपने कार्यक्षेत्र में उत्पादकता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति करने वाली कंपनी माइकल पेज इंडिया की ‘कैंडिडेट पल्स रिपोर्ट 2026’ के मुताबिक, पेशेवरों ने एआई कौशल विकसित करने में गहरी रुचि दिखाई है। हालांकि, उन्होंने इसके इस्तेमाल को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 88 प्रतिशत प्रतिभागियों को एआई से अपनी दक्षता और उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं 65 प्रतिशत ने मानवीय निर्णय क्षमता और सहज समझ की कमी को लेकर चिंता जताई। इसके अलावा, 61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने निजता और आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
माइकल पेज के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक निलय खंडेलवाल ने कहा, ‘‘भारत के पेशेवर अब यह नहीं पूछ रहे हैं कि एआई का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, बल्कि वे इसका रोजाना इस्तेमाल कर रहे हैं। कार्यबल उत्पादकता बढ़ने को लेकर आशावादी है, लेकिन इसके साथ मानवीय निर्णय क्षमता और आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। अब बातचीत पर आधारित उपकरणों से आगे बढ़कर ऐसे एआई को अपनाने का अवसर है, जो विश्लेषण, निर्णय लेने और परिचालन प्रक्रियाओं का हिस्सा बने।’’
यह रिपोर्ट एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 11 बाजारों के 3,401 पेशेवरों से मिली जानकारी पर आधारित है। इनमें 2,550 भारतीय पेशेवर भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर प्रतिभागी एआई को लाभकारी मानते हैं, लेकिन वे इससे जुड़े जोखिमों को लेकर भी सचेत हैं। बड़ी संख्या में प्रतिभागियों का मानना है कि एआई उनके उद्योग में बड़ा बदलाव ला सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई सीखने की इच्छा लगभग सभी पेशेवरों में है और इसे करियर में आगे बढ़ने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। देश में अधिकतर प्रतिभागी अपनी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के साथ भविष्य की भूमिकाओं के लिए भी खुद को तैयार करना चाहते हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय