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दस अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले जारी निषेधाज्ञा से जंतर मंतर को बाहर रखा गया था: पुलिस

नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के आह्वान से पहले राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न स्थानों पर निषेधाज्ञा लागू की गई थी, वहीं जंतर-मंतर को इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया था, और वहां पूर्व लिखित अनुमति तथा शाम 5 बजे की समय-सीमा के अनुसार प्रदर्शनों की अनुमति थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर एक अतिरिक्त हलफनामे में, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा कि नयी दिल्ली क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की गई थी।

यह हलफनामा माकपा के महासचिव एम ए बेबी द्वारा दायर एक रिट याचिका के जवाब में दाखिल किया गया था। यह याचिका उच्चतम न्यायालय के 15 अक्टूबर के उस आदेश के अनुपालन में थी, जिसमें दिल्ली पुलिस को नयी दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी किए गए आदेशों को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले 15 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस ने इसी याचिका में एक हलफनामा दायर किया था, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने को चुनौती दी गई थी।

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा था कि पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम, जिसमें मेट्रो रेल सेवाओं का नियमन भी शामिल था, खुफिया जानकारी और मौजूदा तथा लगातार बदलती जमीनी स्थिति के आकलन पर आधारित एहतियाती उपाय थे।

मंगलवार को अपने अतिरिक्त हलफनामे में, पुलिस ने कहा कि विरोध स्थल के पास संसद, राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट जैसे प्रमुख परिसरों तथा जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सामने आई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए ये प्रतिबंध लगाए गए थे।

हलफनामे में कनॉट प्लेस, तुगलक रोड, संसद मार्ग, चाणक्यपुरी, बाराखंभा रोड, सफदरजंग एन्क्लेव और डिफेंस कॉलोनी के पुलिस उप-मंडलों के लिए 19 अगस्त से 26 सितंबर के बीच जारी किए गए सात आदेशों को सूचीबद्ध किया गया।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश