कोलकाता, तीन नवंबर (भाषा) कोलकाता के एक उद्योग मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर देश के पॉल्ट्री क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले मक्के और अन्य जरूरी पशु आहार की बार-बार होने वाली कमी तथा कीमतों में उतार-चढ़ाव के मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने दावा किया कि यह समस्या अब एक संरचनात्मक चुनौती बन गई है, जिसके समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित हस्तक्षेप की जरूरत है।
संगठन ने सोमवार को प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि यह समस्या केवल पॉल्ट्री उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लाखों पॉल्ट्री किसानों और उनसे जुड़े कारोबार की आर्थिक व्यवहार्यता, मक्का उत्पादकों के हितों, ग्रामीण रोजगार, कृषि ऋण, औद्योगिक निवेश और देश की विदेशी मुद्रा स्थिति पर भी पड़ता है।
चैंबर ने कहा कि इस बार-बार पैदा होने वाले संकट से निपटने के लिए अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उसने जरूरी पशु आहार सामग्री की उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
अनमोल फीड्स के प्रबंध निदेशक और एमसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अमित सारावगी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण पॉल्ट्री आहार उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए कुछ हद तक एथनॉल क्षेत्र की मांग और फसल उत्पादन में कमी को जिम्मेदार ठहराया।
सारावगी ने कहा, ''अगले तीन महीनों में पशु प्रोटीन की भारी कमी हो जाएगी।'' उन्होंने चेतावनी दी कि पशु आहार की कीमतों में महंगाई पहले ही 20 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कमी से पशु आहार उद्योग पर लागत का दबाव और बढ़ सकता है। इससे पशु प्रोटीन की उपलब्धता और उसकी कीमतों को लेकर भी समस्या पैदा हो सकती है।
सारावगी ने भारतीय पशु आहार बाजार का आकार करीब 10 लाख करोड़ रुपये आंका।
एमसीसीआई के अध्यक्ष मुनीश जायसवाल ने पत्र में कहा कि उनका संगठन संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्यसमूह गठित करने, संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श करने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को इच्छुक है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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