नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) भारत 100 प्रतिशत टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगा सकता है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) ने यह आशंका जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें 360 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई हैं। इसके चलते विदेशी खरीदारों और घरेलू उद्योगों, खासकर एथनॉल निर्माताओं तथा पॉल्ट्री चारा उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
उद्योग संगठन ने कहा कि घरेलू कीमतों में वृद्धि और महंगाई का दबाव बढ़ने से सरकार के हस्तक्षेप की संभावना भी बढ़ सकती है। खासकर वर्ष 2027 में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, सरकार ने अब तक निर्यात पर कोई नया प्रतिबंध लगाने की घोषणा नहीं की है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, देश में टूटे चावल का औसत थोक मूल्य दो नवंबर को बढ़कर 3,036 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जो 10 अक्टूबर को 2,883 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह कीमतों में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, टूटे चावल की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर सितंबर, 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 5.38 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 4.37 प्रतिशत थी। यह घरेलू बाजार में कीमतों पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
आईआरईएफ के महानिदेशक विनोद कौल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में टूटे चावल की कीमत 360 डॉलर प्रति टन से अधिक होना गंभीरता से ध्यान देने का विषय है, क्योंकि यह अब एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल बन गया है।
उन्होंने कहा, ''टूटे चावल की कीमतों में 360 डॉलर प्रति टन से अधिक की वृद्धि पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। एथनॉल उत्पादन, पॉल्ट्री चारे और कई अन्य उद्योगों में टूटे चावल महत्वपूर्ण कच्चा माल बन गया है।''
कौल ने कहा कि घरेलू उद्योगों और निर्यात बाजारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से इसकी उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
भारत के एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के विस्तार से टूटे चावल, मक्का और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिशेष चावल सहित अनाज आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ी है।
भाषा
राजेश अजय
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