लखनऊ, तीन नवंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को दावा करते हुए कहा कि भारत चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
चौहान ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान चौपाल को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय था जब हम अपनी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त गेहूं पैदा नहीं कर पाते थे।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारत पीएल-480 के तहत अमेरिका जैसे देशों से लाल गेहूं आयात करता था, जो वहां पशु खाते थे।
इस अवसर पर उन्होंने किसानों के साथ सीधा संवाद किया और खेती की चुनौतियों, मिट्टी की उर्वरता तथा कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कृषि मंत्री ने कहा कि अब देश में खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है और अन्न के भंडार भरे हुए हैं।
चौहान ने कहा कि दुनिया को चलाने के लिए भोजन आवश्यक है और हमारे किसान देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब आवश्यकता है कि उत्पादन के साथ-साथ धरती की सेहत को भी सुरक्षित रखा जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सड़कें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी खेती के लिए अन्य सुविधाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तर प्रदेश की 374 ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है। इसके लिए 544 करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
चौहान ने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग आवश्यकता से अधिक न करें। उन्होंने कहा कि किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हेल्थ कार्ड) के माध्यम से अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेती में फसलों के लिए उपयोगी अनेक जीव भी समाप्त हो रहे हैं। इसलिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन और कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
कृषि मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिन किसानों के पास पांच बीघा जमीन है, वे कम से कम एक बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती करें।
एक बयान के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण अभियान के साथ हुई। चौहान ने संस्थान परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
भाषा आनन्द
रवि कांत अजय
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