रायपुर, तीन नवंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी ने माओवादियों की असंवैधानिक 'जनताना सरकार' का समर्थन किया और हाल ही में एक 'नकली संसद' आयोजित कर संसद का मजाक उड़ाया।
नवा रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय 'छत्तीसगढ़ राज्योत्सव' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है, जो लोग कानून का पालन करते हैं, उन्हें नागरिक माना जाएगा, लेकिन कानून तोड़ने वालों से सुरक्षा बल सख्ती से निपटेंगे, चाहे वह बस्तर हो, पूर्वोत्तर हो या कश्मीर।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 साल के शासनकाल के दौरान छत्तीसगढ़ में विकास कार्य हुए थे, लेकिन उस समय केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में नक्सलवाद को खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी, जिसके कारण आदिवासी क्षेत्रों में विकास का सपना अधूरा रह गया।
शाह ने कहा कि 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद राज्य सरकार ने दो महीने के भीतर ही नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''जिस धरती पर संस्कृति की गलियां होनी चाहिए थीं, वहां रेड कॉरिडोर बनाया गया था। जिस जंगल से महुआ, तेंदूपत्ता और लोकगीत निकलने चाहिए थे, वहां बारूदी सुरंगें बिछाई गईं। जिस बच्चे के हाथ में कलम होनी चाहिए थी, उसे स्कूल से अगवा करके बंदूक थमा दी गई। जहां स्कूल की घंटी बजनी चाहिए थी, वहां स्कूल की इमारत ही उड़ा दी गई थी।''
मानवाधिकारों के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों पर निशाना साधते हुए शाह ने पूछा कि क्या मानवाधिकार केवल विकास में बाधा डालने वाले हथियारबंद माओवादियों के लिए हैं, गरीब आदिवासियों के लिए नहीं?
उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों में हिंसा के कारण जिन लोगों ने अपने अंग गंवा दिए थे, सरकार ने उन्हें कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए हैं, ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें।
शाह ने कहा, ''जो लोग बस्तर की स्थिति पर लंबे-चौड़े लेख लिखते थे और सलाह देते थे, लेकिन उनमें इस इलाके में आकर एक दिन बिताने की भी हिम्मत नहीं थी, मैं उन्हें अब यहां आने का निमंत्रण देता हूं। डरो मत, अब तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। यहां आकर विकास की लहर को देखो।''
उन्होंने कहा, ''अगर आपको लोगों की थोड़ी भी परवाह है, तो यहां के लोगों के दर्द और तकलीफों को उजागर करते हुए कुछ लेख लिखें।''
कांग्रेस पर लगातार नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए शाह ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के 2010 के एक बयान का जिक्र किया।
शाह के मुताबिक चिदंबरम ने कथित तौर पर कहा था कि माओवादियों को हथियार डालने की जरूरत नहीं है, उस उन्हें हिंसा छोड़ देनी चाहिए।
शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कोई भी आत्मसमर्पण करना चाहता है, उसे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होना होगा। ऐसा करने से इनकार करने वालों के खिलाफ सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और 10 प्रतिशत मारे गए हैं, जिससे देश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने माओवादियों की समानांतर 'जनताना सरकार' का समर्थन किया था। इस सरकार का अपना गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री था, जबकि उसे कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं था।
भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह ने कहा, ''राहुल गांधी ने एक 'नकली' जनताना सरकार और असंवैधानिक सरकारों का समर्थन किया और अब एक 'नकली' संसद आयोजित करके उन्होंने संसद का मजाक उड़ाया है।''
उन्होंने कहा, ''एक 'नकली' संसद आयोजित करके राहुल ने चर्चा का सिर्फ दिखावा किया है। मैं राहुल जी से कहना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है।''
शाह ने कहा, ''राहुल जी, नरेन्द्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। संसद चलने दीजिए। हम विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। अगर हिम्मत है तो देश की जनता के सामने चर्चा करके दिखाइए। हाथ में संविधान लेकर घूमने से संविधान का समर्थन नहीं होता है, आचरण संवैधानिक होना चाहिए। आपने संसद को रोक रखा है। आप संसद चलने दीजिए। चर्चा में दो-दो हाथ कर लीजिए। देश की जनता को मालूम पड़ जाएगा कि सच्चा कौन है और झूठा कौन।''
भाषा
संजीव रवि कांत