शिलांग, तीन नवंबर (भाषा) मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने कारीगरों के लिए आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करने के साथ-साथ मूल निवासियों की परंपराओं, पारंपरिक कौशल और ज्ञान को संरक्षित करने के उद्देश्य से 11 गांवों की पहचान की है।
यहां यू सोसो थाम सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय विरासत कला एवं शिल्प ग्राम महोत्सव में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में संगमा ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रयासों और सरकार के निरंतर हस्तक्षेप की आवश्यकता है, ताकि परंपराओं, कौशल और मूल निवासियों के ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘11 कला एवं शिल्प गांवों की पहचान के जरिए सरकार पारंपरिक प्रथाओं को संरक्षित करने के साथ ही आजीविका के स्थायी अवसरों के लिए मंच तैयार कर रही है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस समारोहों के तहत आयोजित यह महोत्सव स्वतंत्रता सेनानियों और उन हस्तियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी था, जिन्होंने राज्य की कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने और समृद्ध बनाने में योगदान दिया था।
उन्होंने कहा कि यह अवसर अपनी जड़ों का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सहेजकर रखने के महत्व की याद दिलाता है।
उन्होंने जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मूल निवासियों का ज्ञान और पारंपरिक प्रथाएं समय के साथ लुप्त न हों।
जनजातीय गौरव दिवस आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में आदिवासी समुदायों के योगदान को याद करना भी है।
भाषा तान्या अविनाश
अविनाश