(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) युवा ओलंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाली तैराक धिनिधि देसिंघु ने भारत को गौरवान्वित किया है लेकिन 16 वर्ष की इस खिलाड़ी की नजरें आगे बेहतर प्रदर्शन पर लगी है ।
डकार में युवा ओलंपिक में महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 56 . 27 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीतने वाली धिनिधि ने भारत को तैराकी में पहला पदक दिलाया । उन्होंने भारत के पदकों का खाता भी खोला ।
धिनिधि को हालांकि 56 सेकंड की बाधा पार करने या स्वर्ण जीतने की उम्मीद थी लेकिन दोनों ही नहीं होने से वह दुखी है ।
उन्होंने डकार से पीटीआई से कहा ,‘‘ मेरी खुद से उम्मीदें अलग थी । मैं 56 सेकंड से कम में पूरा करना चाहती थी या स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी लेकिन यह नहीं हो सका ।’’
धिनिधि ने कहा ,‘‘ मैं रोमांचित भी थी और निराश भी ।’’
भारतीय तैराकों का प्रदर्शन अतीत में इतना अच्छा नहीं रहा है और महिला तैराकी में तो हालात और खराब है । धिनिधि को इसका इल्म है और उन्हें पता है कि युवा ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय तैराक बनने के क्या मायने हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘ देश के लिये पहला पदक जीतना खास है । तैराकी में एक लड़की से आप इसकी अपेक्षा नहीं करते क्योंकि भारत में तैराकी की स्थिति ऐसी ही है और महिला तैराकी तो और भी पीछे है । इस तरह से देखें तो यह काफी गर्व का पल है ।’’
पेरिस ओलंपिक 2024 में 14 वर्ष की उम्र में भारतीय दल की सबसे युवा सदस्य रही धिनिधि ने कहा ,‘‘ मैं इसके बारे में (ओलंपियन होने) ज्यादा नहीं सोचती । ओलंपिक के बाद युवा ओलंपिक खेलना रोचक है । मैं ओलंपिक के बारे में ज्यादा नहीं सोचती क्योंकि मैने क्वालीफाई नहीं किया था । मैं सर्वश्रेष्ठ भारतीय थी और चुनी गई ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ युवा ओलंपिक में उन खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा कर रही हूं जिनका सामना भविष्य में विश्व चैम्पियनशिप या विश्व जूनियर चैम्पियनशिप में होगा । इसलिये यहां ओलंपिक से ज्यादा दबाव है ।’’
भाषा मोना नमिता
नमिता