नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) दिल्ली में मंगलवार को वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 348 पर पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
एक पूर्वानुमान के अनुसार, अगले तीन दिनों में दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान और बढ़ने की आशंका है।
दिल्ली का एक्यूआई दो नवंबर को 324 और एक नवंबर को 261 दर्ज किया गया था।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए काम करने वाले निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के अनुसार, शहर में पीएम2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान दो नवंबर के 8.583 प्रतिशत से बढ़कर तीन नवंबर को 15.301 प्रतिशत होने का अनुमान है।
पराली जलाने का योगदान ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब आसपास के राज्यों में खेतों में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
उपग्रहों ने दो नवंबर को निगरानी वाले राज्यों में धान की पराली जलाने के 219 मामलों का पता लगाया, इनमें पंजाब में 98, राजस्थान में 67, मध्यप्रदेश में 48, उत्तर प्रदेश में चार और हरियाणा में दो मामले शामिल हैं।
इस दिन दिल्ली और उत्तराखंड में पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया।
पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान चार नवंबर को बढ़कर 20.057 प्रतिशत और पांच नवंबर को 22.207 प्रतिशत होने की आशंका है।
डीएसएस द्वारा अगले तीन दिनों में पराली जलाने के योगदान का पूर्वानुमान आग लगने की घटनाओं और उनसे होने वाले उत्सर्जन के जलवायु संबंधी आंकड़ों के आधार पर लगाया गया।
इस साल 15 सितंबर से दो नवंबर के बीच खेतों में पराली जलाने की कुल 3,535 घटनाएं दर्ज की गईं।
इनमें सबसे अधिक 1,612 घटनाएं पंजाब में दर्ज की गईं। इसके बाद राजस्थान में 738, मध्यप्रदेश में 614, उत्तर प्रदेश में 349, उत्तराखंड में 176, हरियाणा में 44 और दिल्ली में पराली जलाने की दो घटनाएं सामने आईं।
भाषा जितेंद्र माधव
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