नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी को राहत देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा कि वह उनके खिलाफ जारी जांच और मामलों से जुड़े ‘‘मीडिया ट्रायल’’ के खिलाफ उनकी याचिका पर विचार करे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि बनर्जी उच्च न्यायालय के फिर से खुलने पर इस मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध कर सकते हैं।
बनर्जी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई केवल एक बार हुई, जब याचिकाकर्ता को बताया गया कि उसके पास ‘रोस्टर’ नहीं है।
आलम ने कहा, ‘‘तब से मैंने उच्च न्यायालय के सामने तीन बार इस मामले का जिक्र किया है, लेकिन याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है, जबकि मेरे अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।’’
उन्होंने दलील कि इस अदालत ने कई फैसलों में यह माना है कि ‘मीडिया ट्रायल’ के जरिए ‘निर्दोष होने की धारणा’ को खत्म नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि दुर्गा पूजा और दीपावली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को उच्च न्यायालय फिर से खुल रहा है, और याचिकाकर्ता के पास यह विकल्प है कि वह अंतरिम राहत पर विचार के लिए इस मामले का उल्लेख कर सके।
इसने उच्च न्यायालय से बनर्जी की याचिका पर विचार करने को कहा।
लोकसभा सदस्य ने उच्च न्यायालय से ऐसे आदेश का अनुरोध किया है जो जांच एजेंसियों को उनकी निजी जानकारी मीडिया संस्थानों के साथ साझा करने से रोके। उन्होंने आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी द्वारा चुनिंदा जानकारी लीक किए जाने से उनकी छवि खराब हो रही है।
उन्होंने कहा कि इससे उनके खिलाफ जारी जांच पर भी असर पड़ सकता है।
कई मामलों में जांच का सामना कर रहे बनर्जी ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां तलाशी, पूछताछ और अन्य कानूनी कदमों की जानकारी मीडिया के एक हिस्से को लीक कर रही हैं, और इस वजह से अलग-अलग अखबारों में कई खबरें छपी हैं।
उन्होंने कहा है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा जानबूझकर इस तरह जानकारी लीक किया जाना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके सम्मान, प्रतिष्ठा और निष्पक्ष जांच के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
बनर्जी ने कहा कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि खराब हो सकती है और उनके खिलाफ जारी जांच भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने मीडिया संस्थानों को यह निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है कि वे उनसे जुड़ी ऐसी खबरें प्रदर्शित या प्रकाशित न करें, जो जारी जांच का हिस्सा हैं।
भाषा
नेत्रपाल माधव
माधव